अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण
माधोपुर, 15 जुलाई 2026 डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), माधोपुर, पश्चिम चंपारण द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) परियोजना के तहत “किसान गोष्ठी सह जागरूकता अभियान” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान भाई-बहनों ने भाग लेकर कृषि विकास के प्रति अपनी जागरूकता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर बिहार की पूर्व माननीय उपमुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ बेतिया विधायक के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा किया गया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग तथा डिजिटल प्लेटफॉर्मों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर आरआरएस के वैज्ञानिक डॉ. नीरज कुमार,आरजीएम के वैज्ञानिक डॉ. रंजन एवं ने किसानों को फसल उत्पादन, जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक खेती तथा कृषि में नवीन अनुसंधान संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत कम करती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मास्टर फार्मर ट्रेनर एवं प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ श्री दीपेन्द्र दुबे, जो पैक्स सदस्य, माधोपुर भी हैं, ने अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती के सफल मॉडल, जीवामृत, बीजामृत तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके व्यावहारिक अनुभवों को किसानों ने अत्यंत रुचि के साथ सुना। कार्यक्रम में केवीके माधोपुर के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दुबे, डॉ. हर्षा बी.आर., डॉ. चेलपुरी रामुलु तथा केंद्र के अन्य वैज्ञानिक एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने किसानों के प्रश्नों का समाधान किया तथा उन्हें कृषि संबंधी नवीन तकनीकों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित “किसान सारथी” मोबाइल ऐप के प्रति जागरूकता अभियान रहा। किसानों को ऐप की विशेषताओं, उपयोगिता एवं पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसान सारथी ऐप किसानों तक वैज्ञानिक सलाह, कृषि तकनीक, मौसम संबंधी जानकारी, फसल प्रबंधन एवं विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम है।

जागरूकता अभियान के दौरान उपस्थित सभी किसानों ने अपने मोबाइल फोन में किसान सारथी ऐप डाउनलोड किया तथा सफलतापूर्वक पंजीकरण (Registration) किया। इसके साथ ही किसानों ने रियल-टाइम पोलिंग में भी उत्साहपूर्वक भाग लिय अपने संबोधन में पूर्व उपमुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का उपयोग किसानों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया तथा किसान सारथी जैसे प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्राकृतिक खेती, कृषि नवाचारों एवं डिजिटल कृषि सेवाओं के प्रति गहरी रुचि दिखाई। प्रतिभागियों ने ऐसे कार्यक्रमों को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन किसानों को प्राकृतिक खेती, वैज्ञानिक कृषि एवं डिजिटल कृषि सेवाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सफल पहल साबित हुआ।






