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प्राकृतिक खेती जिला कार्यशाला का सफल आयोजन, माननीय सांसद, वैज्ञानिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने किसानों को दिया टिकाऊ कृषि का संदेश

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अनिल कुमार शर्मा मझौलिया, पश्चिम चम्पारण

कृषि विभाग, बिहार सरकार एवं आत्मा (ATMA), पश्चिम चम्पारण के संयुक्त तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), माधोपुर परिसर में “प्राकृतिक खेती जिला कार्यशाला” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रसार, उत्पादन लागत में कमी, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ वैज्ञानिक सह अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह के मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग, आत्मा तथा कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वित सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधियों, कृषि पदाधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल थे। विशिष्ट अतिथि माननीय विधायक श्री नारायण प्रसाद (नौतन), विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) श्री सौरभ कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि श्री विभय राजन चौबे, कृषि विभाग से अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, नरकटियागंज, सहायक निदेशक कृषि अभियंत्रण, आरआरएस एवं आरजीएम के प्रभारी पदाधिकारी तथा कृषि विभाग के कर्मचारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के आगमन, दीप प्रज्वलन एवं स्वागत भाषण के साथ हुआ। माननीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने अपने संबोधन में किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। विधायक श्री नारायण प्रसाद ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता एवं मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, डॉ. हर्षा बी. आर., डॉ. सौरभ दुबे एवं अन्य वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांत, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, आच्छादन (मल्चिंग), वाफसा सिद्धांत, जैविक पोषक तत्व प्रबंधन तथा एकीकृत कृषि प्रणाली के बारे में तकनीकी जानकारी प्रदान की।

वैज्ञानिकों ने बताया कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे भूमि की जैविक सक्रियता बढ़ती है, लाभकारी सूक्ष्मजीवों का संरक्षण होता है तथा फसल उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आता है। किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व की भी जानकारी दी गई।कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में स्थापित प्राकृतिक खेती प्रदर्शन प्लॉट का भ्रमण भी कराया गया। यहां किसानों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यवहारिक रूप में देखा और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रदर्शन प्लॉट में प्राकृतिक पद्धति से उगाई जा रही फसलों, जैविक पोषक प्रबंधन एवं कम लागत वाली तकनीकों का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम में जिले के प्रगतिशील किसान श्री सुशील जायसवाल, श्री दीपेन्द्र दुबे, श्री परशुराम सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान भाई-बहनों ने भाग लिया। किसानों ने प्राकृतिक खेती एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग से संबंधित अपने अनुभव साझा किए तथा वैज्ञानिकों से सुझाव प्राप्त किए। किसानों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को ग्रामीण स्तर तक विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती भविष्य की आवश्यकता है और इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने कृषि विभाग, आत्मा एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, पदाधिकारियों एवं किसानों ने प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ कृषि व्यवस्था के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।इस अवसर पर कृषि विभाग, आत्मा, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिकगण, जनप्रतिनिधि एवं जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सैकड़ों किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों में नई जागरूकता पैदा करने तथा कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।

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