अमेरिका–ईरान युद्ध में सीजफायर से विश्व में खुशी की लहर, गांधीवादी विचारधारा के लोगों ने जताई प्रसन्नता

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रमेश ठाकुर – पश्चिम चंपारण, बिहार
दिनांक:- 08-04-2026

पूर्वांचल गांधीवादी डॉ. संपूर्णानंद शोध पुस्तकालय, सत्यपथ गोविंद नगर (थाना- शाहजहांपुर, गोरखपुर) के प्रतिनिधि ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिका–ईरान युद्ध में सीजफायर की खबर से पूरे विश्व में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस समाचार ने हर समाज, धर्मगुरुओं और लोकतंत्र के विभिन्न वर्गों के साथ-साथ गांधीवादी विचारधारा के लोगों को भी गहरी राहत दी है। उन्होंने कहा कि जैसे ही युद्ध विराम की सूचना मिली, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अस्वस्थ होने और सांस लेने में तकलीफ के बावजूद यह खबर सुनते ही उन्हें मानसिक रूप से राहत महसूस हुई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि युद्ध के दौरान बच्चों और आम लोगों की पीड़ा, भय और जीवन बचाने की गुहार ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था।

बताया गया कि 1 मार्च को बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर स्थित पथिक निवास में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्हें आमंत्रित किया गया था। उसी दिन से उन्होंने माननीय राष्ट्रपति से युद्ध विराम के लिए “शांति दल” और “पीस एक्सपीडिशन” भेजने का आग्रह किया था। इसके साथ ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रूस और चीन सहित कई देशों के नेताओं को पत्र लिखकर युद्ध रोकने की अपील की गई थी। युद्ध की गंभीरता को देखते हुए 3 मार्च से कुशीनगर में “युद्ध विराम एवं शांति सत्याग्रह” की शुरुआत की गई। हालांकि पहले दिन उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया, जिससे वे कुशीनगर नहीं पहुंच सके। अगले दिन 4 मार्च को कुशीनगर पहुंचकर उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ शांति आंदोलन में भाग लिया।

इस दौरान भिक्षु संघ कुशीनगर के सचिव डॉ. नव रत्न भंते के नेतृत्व में शांति वार्ता और कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, युवाओं और आम नागरिकों ने भाग लेकर युद्ध विराम की मांग उठाई। उन्होंने सभी सहयोगियों, पत्रकारों और समाज के उन अनगिनत लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने युद्ध रोकने के लिए अपनी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि यह कहना कठिन है कि युद्ध विराम किसके प्रयास से हुआ, लेकिन दुनिया के अरबों लोगों की दुआ और शांति की चाह ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंत में उन्होंने संकल्प लेते हुए कहा कि अब उनका उद्देश्य “युद्ध रहित वसुंधरा” का निर्माण करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इंसान जन्म से हथियार लेकर नहीं आता, तो फिर युद्ध की आवश्यकता क्यों है।

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