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सेवा से खेती तक: पूर्व सहायक कमांडेंट उत्कृष्ट पांडे ने चंदन की खेती से किसानों को दिखाई स्वावलंबन की राह

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

वाल्मीकिनगर। कभी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 21वीं वाहिनी में सहायक कमांडेंट के रूप में कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में सेवा देने वाले उत्कृष्ट पांडे आज किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। सरकारी सेवा के बाद उन्होंने अपनी जन्मभूमि की ओर रुख किया और वर्ष 2018 से सफेद चंदन की खेती को अपने जीवन का नया मिशन बना लिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए करने के बाद उत्कृष्ट पांडे ने यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2011 में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर वाल्मीकिनगर में तैनात हुए। बाद में उनकी आखिरी तैनाती बिहार के सुपौल जिले के वीरपुर में रही। कुछ वर्षों की सेवा के बाद कुछ नया करने की चाह में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।

उनका मानना है कि “जो पानी से नहाता है, वह लिबास बदलता है और जो पसीने से नहाता है, वह इतिहास बदलता है।” इसी सोच के साथ उन्होंने कृषि के क्षेत्र में कदम रखा। दो हेक्टेयर भूमि में करीब 250 पौधों से सफेद चंदन की खेती शुरू कर उन्होंने अपने सपनों को नया रूप दिया। आज उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित करीब 10 एकड़ के फार्म हाउस में चंदन, काली हल्दी समेत कई औषधीय गुणों वाले पौधों की खेती की जा रही है।उत्कृष्ट पांडे का कहना है कि चंदन और काली हल्दी जैसी फसलों में किसानों के लिए बेहतर संभावनाएं हैं। सफेद चंदन का उपयोग औषधि, सुगंध और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। चंदन के पौधों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और यह कृषि वानिकी के लिए अनुकूल माना जाता है। नर्सरी स्तर पर चंदन के पौधे करीब 100 से 150 रुपये तक में उपलब्ध होने की बात भी वे बताते हैं।

उनके अनुसार, उचित देखभाल और निर्धारित अवधि के बाद चंदन के पेड़ों से अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। वे किसानों को यह संदेश दे रहे हैं कि खेती को केवल पारंपरिक तरीके तक सीमित न रखकर कृषि वानिकी और औषधीय पौधों की खेती से भी आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उत्कृष्ट पांडे किसानों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करने में जुटे हैं। उनका कहना है कि गांवों को समृद्ध बनाने के लिए मिट्टी, पानी, हवा और पारंपरिक ज्ञान को बचाना होगा। किसान को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रकृति का संरक्षक भी बनाना होगा। कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके कार्यों को विभिन्न स्तरों पर पहचान भी मिली है। उन्हें तरु मित्र सम्मान, देवभूमि बागवानी पुरस्कार और कृषि वानिकी किसान पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। ई-कॉमर्स के माध्यम से आम लोगों और किसानों को सफेद चंदन के पौधे उपलब्ध कराने का कार्य भी किया जा रहा है।

दूरभाष पर स्वरांजलि सेवा संस्थान के संस्थापक डी. आनंद से बातचीत के दौरान उत्कृष्ट पांडे ने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में भी चंदन की खेती की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। इससे क्षेत्र के किसानों को वैकल्पिक आय का स्रोत मिल सकता है। आने वाले समय में स्वरांजलि सेवा संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर सह समाजसेवी संगीत आनंद के प्रतापगढ़ जाकर चंदन की खेती की तकनीक और संभावनाओं को समझने की बात कही गई है। उल्लेखनीय है कि 6 नवंबर 2014 को गंडक नदी के तट पर आयोजित पहली नारायणी गंडकी महाआरती के दौरान तत्कालीन सहायक कमांडेंट उत्कृष्ट पांडे को पूर्व मंत्री विनय बिहारी द्वारा नारायणी गंडकी सम्मान से सम्मानित किया गया था।

आज ऋषिग्राम ऑर्गेनिक्स के संस्थापक के रूप में उत्कृष्ट पांडे का प्रयास है कि उत्तर भारत में लगभग विलुप्तप्राय हो चुके सफेद चंदन को फिर से पहचान मिले और किसान कृषि वानिकी के माध्यम से स्वावलंबन की ओर बढ़ें। उनका मानना है कि चंदन की खुशबू केवल बाजार तक नहीं, बल्कि गांवों की समृद्धि तक पहुंचनी चाहिए।

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