अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण, बिहार
माधोपुर, 28 सितम्बर 2026 कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के अंतर्गत पश्चिम चंपारण जिले की चयनित कृषि सखियों के लिए पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम (28 सितम्बर से 02 अक्टूबर 2026) का शुभारंभ आज केन्द्र परिसर में किया गया। प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के मार्गदर्शन में आयोजित एवं डॉ. हर्षा बी. आर., वैज्ञानिक (फसल उत्पादन) एवं नोडल पदाधिकारी, NMNF, केवीके माधोपुर द्वारा किया जा रहा है।
उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नीरज कुमार, प्रमुख, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र (RRS), माधोपुर रहे। इस अवसर पर डॉ. चेलपुरी रामुलु, वैज्ञानिक (कृषि अभियांत्रिकी) तथा डॉ. सौरभ दुबे, वैज्ञानिक (पादप संरक्षण) भी उपस्थित रहे।

अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. नीरज कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का विकल्प मात्र नहीं है, बल्कि यह मृदा स्वास्थ्य, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं टिकाऊ उत्पादन पर आधारित एक समग्र कृषि पद्धति है। उन्होंने कहा कि कृषि सखियां किसानों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के प्रसार में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, प्राकृतिक कीट प्रबंधन, मल्चिंग, फसल विविधीकरण तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग से लागत कम करने एवं मृदा उर्वरता बनाए रखने पर जोर दिया। डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती एक किसान-केंद्रित, कम लागत वाली एवं पर्यावरण अनुकूल प्रणाली है। पश्चिम चंपारण जैसे कृषि प्रधान जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग से कृषि लागत को कम किया जा सकता है और मृदा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। डॉ सिंह ने कृषि सखियों से आह्वान किया कि वे प्राप्त ज्ञान को अपने गांवों में किसानों के साथ साझा करें तथा प्रदर्शन प्लॉट, खेत भ्रमण एवं व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से किसानों में विश्वास पैदा करें।

डॉ. चेलपुरी रामुलु ने प्राकृतिक खेती में कृषि यंत्रों एवं कृषि अभियांत्रिकी तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. सौरभ दुबे ने जैविक एवं वनस्पति आधारित कीट-रोग प्रबंधन, मित्र कीटों के संरक्षण तथा पर्यावरण अनुकूल पादप संरक्षण उपायों की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा एवं सिद्धांत, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, बीज उपचार, जीवामृत एवं बीजामृत निर्माण एवं उपयोग, प्राकृतिक कीट-रोग प्रबंधन, जल संरक्षण, मल्चिंग, मिश्रित एवं बहुफसली खेती तथा खेत-स्तरीय व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य कृषि सखियों को स्थानीय स्तर की प्रशिक्षक एवं तकनीकी सहयोगी के रूप में तैयार करना है।

कार्यक्रम के संचालन में कमलेश कुमार, विनीत कुमार, मनोज कुमार रजक एवं शंभू कुमार का सक्रिय सहयोग रहा। अंत में प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को सीखकर जिले के किसानों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।






