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प्रकृति प्रेम से परिवार की जड़ स्थिर और मजबूत बनती है-पं०भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


मधुबनी ,रक्षाबंधन एवं संस्कृत दिवस के अवसर पर पूर्व प्राचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने अपने वयोवृद्ध पिता, पूर्व प्राचार्य पंडित जगदंबा उपाध्याय व्याकरणाचार्य के साथ वृक्षों में रक्षा सूत्र बांधकर लोगों को पर्यावरण प्रेम के प्रति जागरूक किया।
इस अवसर पर पंडित जगदंबा उपाध्याय ने कहा कि- आज मुझे गर्व हो रहा है कि अपनी चार पीढियों के साथ वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर संस्कृत दिवस एवं रक्षाबंधन पर्व मना रहा हूं। संस्कृतदिवस: श्रावणमासस्य पूर्णिमायाम् (रक्षाबंधने) आचार्यते। अस्मिन बर्षे संस्कृतदिवस: अगस्तमासस्य 28 तिथौ वर्तिता। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है। यह श्रद्धा, प्रेम और भाई- बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व है!

इस पर्व से परिवार समाज और धर्म की रक्षा के संकल्प का भी अवसर मिलता है। भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हुए, पर्व को सादगी और श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए। वास्तव में पर्व त्यौहार समाज में आपसी प्रेम भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने के साथ ही लोगों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ते हैं। पर्यावरण संरक्षण और माता-पिता के सम्मान तथा सामाजिक सरोकारों को प्रकृति के लिए राखी बांधकर एक सार्थक संदेश दिया जा रहा है। प्रकृति प्रेमी देवेंद्र उपाध्याय, गंगेश्वर यादव , उपेंद्र कुमार, दिनेश कुमार गुप्ता ,देवांश उपाध्याय और आकाश मिश्रा ने भी आस्था पूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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