वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के वन प्रमंडल दो भेड़िहारी जंगल से निकलकर किसान विजय हालदार की जान लेने वाला बाघ अब तक वन विभाग की पकड़ से बाहर है। बाघ खुले क्षेत्र में विचरण कर रहा है, जबकि उसके खौफ से आसपास के ग्रामीण अंधेरा होते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। बाघ को पकड़ने के लिए घटनास्थल के समीप पिंजरा और मचान लगाया गया है, लेकिन अब तक वन विभाग को सफलता नहीं मिली है। स्वतंत्रता दिवस के दिन भेड़िहारी कॉलोनी निवासी विजय हालदार अपने गन्ने के खेत में घास काट रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे बाघ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग ने बाघ की तलाश तेज कर दी। घटनास्थल के आसपास निगरानी मचान बनाया गया और पिंजरे में छोटे पशु को रखकर बाघ को रेस्क्यू करने की योजना तैयार की गई। वनकर्मी लगातार दिन-रात क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं। खोजबीन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर बाघ के पगमार्क मिलने से उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई, लेकिन बाघ लगातार अपना स्थान बदलकर टीम को चकमा दे रहा है। जहां भी पगमार्क मिलते हैं, वहां वनकर्मियों की टीम तैनात कर निगरानी बढ़ा दी जाती है। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के नेतृत्व में टीम गांवों और जंगल से सटे इलाकों में लगातार अभियान चला रही है।
ध्वनि यंत्र से ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क
बाघ के खतरे को देखते हुए वन विभाग ध्वनि यंत्र के माध्यम से आसपास के गांवों में लगातार प्रचार-प्रसार कर रहा है। ग्रामीणों से अंधेरा होने के बाद घरों से बाहर नहीं निकलने, खेतों की ओर अकेले नहीं जाने और समूह में भी पूरी सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। खासकर जंगल से सटे खेतों में जाने वाले किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ना और ग्रामीणों में व्याप्त भय को कम करना है। बाघ के पकड़े जाने तक वन विभाग की निगरानी और ग्रामीणों की सतर्कता ही सुरक्षा की सबसे अहम कड़ी बनी हुई है।






