समय रहते राहत-बचाव कार्य शुरू नहीं होने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
कई लोग आशियाना उजाड़कर पलायन को मजबूर प्रभावित परिवार
विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा। अनुमंडल क्षेत्र के गंडक पार दियारा इलाके में गंडक नदी का कटाव लगातार तेज होता जा रहा है। मधुबनी प्रखंड की सिसई एवं चिउरही पंचायतों में नदी के कटाव से ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है। कटाव की चपेट में चिउरही उर्दू विद्यालय समेत कई दर्जन घर और गन्ने की फसल आ चुकी है। नदी का कटाव इसी तरह जारी रहा तो लाखों रुपये की लागत से निर्मित चिउरही उर्दू विद्यालय एवं उसकी चारदीवारी के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है। कटाव की रफ्तार बढ़ने के कारण प्रभावित ग्रामीण अपने आशियाने को उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुटे हैं। वहीं खेतों में लगी गन्ने की फसल भी लगातार नदी की धारा में समाती जा रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव निरोधी एवं राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। ग्रामीणों ने प्रशासन पर समय रहते पर्याप्त इंतजाम नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से जिओ बैग आदि के माध्यम से कटाव रोकने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कटाव की तीव्रता के सामने यह व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो रही है।

ग्रामीणों के अनुसार नदी की धारा लगातार विद्यालय एवं आसपास के आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ रही है। ऐसे में यदि तत्काल बड़े स्तर पर कटाव निरोधी कार्य नहीं किया गया तो विद्यालय के साथ-साथ बड़ी संख्या में घर भी नदी की चपेट में आ सकते हैं। कटाव प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर प्रभावी एवं स्थायी कटाव निरोधी कार्य शुरू कराया जाए, ताकि लोगों के घर, विद्यालय और कृषि भूमि को गंडक नदी की धारा में विलीन होने से बचाया जा सके।






