उग्र भीड़ ने सरकारी गाड़ी पर किया हमला, वाहन क्षतिग्रस्त
नंदलाल पटेल बाल्मीकि नगर पश्चिम चंपारण की रिपोर्ट
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के वन प्रमंडल-2 अंतर्गत वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र में शनिवार को बाघ के हमले में किसान विजय हालदार की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा। भेड़ीहारी चौक के समीप दक्षिण टोला के पास हुई घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मृतक का शव वाल्मीकिनगर-बगहा मुख्य पथ पर रखकर सड़क जाम कर दिया। घंटों चले विरोध-प्रदर्शन के बाद एसडीएम चांदनी कुमारी के आश्वासन तथा वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को नौकरी और नियमानुसार मुआवजा देने की पहल के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया।

बताया गया कि शनिवार सुबह करीब 11 बजे 45 वर्षीय विजय हालदार जंगल के समीप अपने खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान वन क्षेत्र से निकले बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में विजय हालदार की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। किसान की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन
ग्रामीणों ने शव को मुख्य सड़क पर रखकर वाल्मीकिनगर-बगहा मार्ग को जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित लोगों द्वारा वन विभाग की एक गाड़ी पलट दिए जाने की बात सामने आई है। वहीं, एक वनपाल के साथ मारपीट किए जाने की भी जानकारी मिली है। ग्रामीणों का आरोप था कि पिछले कई दिनों से आसपास के क्षेत्रों में बाघ की गतिविधियां देखी जा रही थीं, लेकिन वन विभाग की ओर से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
एसडीएम-एसडीपीओ समेत अधिकारी पहुंचे
तनाव की सूचना मिलते ही एसडीएम चांदनी कुमारी, एसडीपीओ निहार भूषण, एसएसबी के सहायक कमांडेंट अवधेश कुमार सहित पुलिस और सशस्त्र बल के जवान मौके पर पहुंचे। वाल्मीकिनगर, नौरंगिया और लौकरिया थानों की पुलिस को भी मौके पर तैनात किया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त कर दिया।
एक माह में बाघ के हमले की तीसरी मौत
विजय हालदार की मौत के बाद क्षेत्र में बाघ के हमलों को लेकर ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। करीब 15 दिन पहले बकरी चरा रहे 62 वर्षीय किसान अकलू यादव पर बाघ ने हमला किया था। गंभीर रूप से घायल अकलू यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इससे पहले वीटीआर से सटे नौरंगिया गांव में धान की सोहनी कर रही एक महिला की भी बाघ के हमले में मौत हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल है।
नौकरी-मुआवजा और बाघ की निगरानी की मांग
ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को सरकारी नौकरी, उचित मुआवजा तथा आबादी वाले क्षेत्रों में बाघ की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही वन विभाग में नौकरी देने की प्रक्रिया भी नियमानुसार आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वन विभाग की टीमें लगातार बाघ की तलाश करने के साथ उसकी गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं।






