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मकरसंक्रांति से मानव सेवा का संदेश मिलता है -पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने मकर संक्रांति के अवसर पर गुरु गोरक्षनाथ मंदिर का भ्रमण कर प्रसाद ग्रहण किया। संयोग वश मंदिर के उत्तराधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का दर्शन प्राप्त हुआ।प्रातः अपने पिता पुत्र और पौत्र के साथ कुल प्रमुख दादी को भोजन कराया। तत्पश्चात मित्र ओमप्रकाश यादव द्वारा जरुरत मंदों को कंबल वितरण कार्यक्रम में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर अपने संबोधन में पूर्व प्राचार्य ने कहा कि- मकर संक्रांति पर्व काल में हिन्दू समाज पवित्र तीर्थों व पवित्र नदियों में स्नान कर समाज के अभावग्रस्त व दीन-हीन बन्धुओं को अन्न, धन, एवं वस्त्रादि प्रदान कर उन्हें जीवन यापन योग्य बनाते हैं।
आज भी भारत के गाँवों में गृहस्थ लोग प्रातःकाल अपने घरों के द्वार पर पशुओं के लिए चारा रख छोड़ते हैं जिससे चरने वाले पशु उस चारे को खाते जाते हैं। परिवार की महिलाएँ प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर अपने सास-श्वसुर व ज्येष्ठ आदि के चरण-स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं और उन्हें वस्त्रादि प्रदान कर परिवार का स्नेहमय उल्लासपूर्ण वातावरण बनाती हैं।
इस प्रकार मकर संक्रमण (मकर संक्रांति) एक श्रेष्ठ पारिवारिक पर्व के साथ-साथ एक सामाजिक व यज्ञ संस्कृति का पर्व भी है। इस अवसर पर सामूहिक यज्ञ किये जाते हैं. यज्ञ की सामग्री में तिलों की मात्रा अधिक रहती है.
यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि यज्ञ द्वारा बादल बनते हैं और वर्षा होती है. यज्ञ सामग्री में जब तिलों की अधिकता रहेगी तो बादल बनेंगे और वर्षा भी होगी क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और इस समय वर्षा की आवश्यकता होती है।
यज्ञ-सामग्री में यव (जौ) की मात्रा अधिक रखकर हवन-यज्ञ करने से बादल विसर्जित होते हैं जो प्रायः फाल्गुन मास में होलिका दहन के अवसर पर देखने को मिलता है. क्योंकि फसल पक जाने के कारण वह समय वर्षा के लिए उपयुक्त नहीं होता।वास्तव में हिन्दू समाज के पर्वोत्सव यज्ञ संस्कृति के उत्सव हैं. ‘उत्सव’ शब्द में ‘उत्’ उपसर्ग के साथ ‘सव’ पद जुड़ा है जिसका एक अर्थ यज्ञ भी होता है।

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