विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
आज के दिन तुलसी पूजन कार्यक्रम में हमारे बाल, युवा एवं प्रौढ़ – सभी को संस्कारों की ओर प्रेरित कर महान भारतीय संस्कृति की ओर ले जाते हैं। अतः भारत के सभी सपूतों को चाहिए कि वे अपने-अपने गली-मुहल्लों में ‘तुलसी पूजन कार्यक्रम’ करें और अपनी संस्कृति के गौरव को समझें, समझायें और लाभ उठायें जो ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के सत्सकंल्प में भागीदार बनते हैं वे संतों का कृपा प्रसाद पाने के अधिकारी बन जाते हैं।
तुलसी के नियमित सेवन से सौभाग्यशालिता के साथ ही सोच में पवित्रता, मन में एकाग्रता आती है और क्रोध पर नियंत्रण होता है आलस्य दूर होकर शरीर में दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है।
तुलसीदल एक उत्कृष्ट रसायन है तुलसी सौंदर्यवर्धक एवं रक्तशोधक है गुणों की दृष्टि से यह संजीवनी बूटी है, औषधियों की खान है अथर्ववेद में काली औषधि (श्यामा तुलसी) को महौषधि कहा गया है भगवान विष्णु को प्रिय होने के कारण इनको ‘वैष्णवी’ भी कहते हैं।
विज्ञान के अनुसार घर में तुलसी-पौधे लगाने से स्वस्थ वायुमंडल का निर्माण होता है। तुलसी से उड़ते रहने वाला तेल आपको अदृश्य रूप से कांति, ओज और शक्ति से भर देता है। अतः सुबह-शाम तुलसी के नीचे धूप-दीप जलाने से नेत्रज्योति बढ़ती है, श्वास का कष्ट मिटता है। तुलसी के बगीचे में बैठकर पढ़ने, लेटने खेलने व व्यायाम करने वाले दीर्घायु व उत्साही होते हैं। तुलसी उनकी कवच की तरह रक्षा करती है।
तुलसी के पास बैठकर प्राणायाम करने से शरीर में बल तथा बुद्धि और ओज की वृद्धि होती है। प्रातः खाली पेट तुलसी का 1-2 चम्मच रस पीने अथवा 5-7पत्ती चबा-चबाकर खाने और पानी-पीने से बल, तेज और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है।
जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वह घर तीर्थ समान पवित्र होता है उस घर में (रोगरूपी) यमदूत नहीं आते। (स्कन्द पुराण)
भगवान महादेव जी कार्तिकेय से कहते हैं- “सभी प्रकार के पत्तों और पुष्पों की अपेक्षा तुलसी ही श्रेष्ठ मानी गयी है कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान, रोपण और धारण करने से वह पाप को जलाती है और स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करती है जो तुलसी के पूजन आदि का दूसरों को उपदेश देता और स्वयं भी आचरण करता है, वह भगवान के परम धाम को प्राप्त होता है।
तुलसी एक दिव्य औषधि तो है ही परंतु इससे भी बढ़कर यह भारतीय धर्म-संस्कृति में प्रत्येक घर की शोभा, संस्कार, पवित्रता तथा धार्मिकता का अनिवार्य प्रतीक भी है।गरुड़ पुराण में आता है कि ‘तुलसी का पौधा लगाने, पालन करने, सींचने तथा उसका ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्वजन्मार्जित पाप जल कर विनष्ट हो जाते हैं।
तुलसी की कंठी धारण करने मात्र से कितनी सारी बीमारियों में लाभ होता है, जीवन में ओज, तेज बना रहता है, रोगप्रतिकारक शक्ति सुदृढ़ रहती है पौराणिक कथाओं में आता है कि तुलसी माला धारण करके किया हुआ सत्कर्म अनंत गुना फल देता है।
गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनी शक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है।






