Thursday, February 12, 2026
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गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर गुरु साक्षात परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः

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गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए

अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण।


गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर स्थानीय रामेश्वर दयाल मध्य विद्यालय में हर्ष उल्लास और पावन पूर्ण तरीके से गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। सर्वप्रथम छात्रों ने विद्यालय के शिक्षकों का चरण वंदन किया तथा शिक्षकों के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। प्रधानाध्यापक श्री ठाकुर और सचिव इनरमन प्रसाद चौरसिया ने अपने अपने संबोधनों में कहा कि गुरु एक कुम्हार की भांति होते हैं जो अपने ज्ञान के प्रकाश से छात्रों के भविष्य को गढ़ने का काम करते हैं। पौराणिक काल से ही गुरु की महिमा का बखान होता चला आ रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में इंसान को गुरु की आवश्यकता पड़ती है। शिक्षक सह पत्रकार अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर गुरु साक्षात परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः। उन्होंने कहा कि जीवात्मा को परमात्मा से मिलाने का काम गुरु ही करते हैं। गुरु पूर्णिमा का वास्तविक अर्थ गुरु पूर्ण मां अर्थात सर्वप्रथम मां ही पूर्ण गुरु है तत्पश्चात गुरु ही पूर्ण मां हैं। प्रथम गुरु जन्म देने वाली मां दूसरा गुरु धरती मां तीसरे गुरु पिता होते हैं जिनकी उंगली थाम कर बालक दुनिया का अनुभव प्राप्त करता है चौथा गुरु शिक्षक होते हैं जो ज्ञान देते हैं तथा पंचम गुरु आध्यात्मिक गुरु होते हैं जो अपने शिष्य को परमात्मा से मिलाते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को भी गुरु की शरण में जानी पड़ी थी। उन्होंने छात्रों से गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नियमित रूप से पठन पाठन करने अनुशासन का पालन करने मर्यादा और संस्कार को जीवन में आत्मसात करते रहने का संकल्प दिलाया। शिक्षक संजय पांडे ने बताया कि गुरु के बिना व्यक्ति का जीवन व्यर्थ है। जिस प्रकार पानी के बिना नदी बेकार है अतिथि के बिना घर आंगन बेकार है प्रेम नहीं है तो सगे संबंधी व्यर्थ है। इस प्रकार जीवन में गुरु नहीं है तो जीवन बेकार है। उन्होंने छात्रों से गुरु के बताएं वचनों का पालन करने का संकल्प दिलाया।
शिक्षिका गुड़िया कुमारी ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि वाणी शीतल चंद्रमा के समान होता है ।मुख्य मंडल सूर्य के समान तथा गुरु चरण त्रिलोक के समान माना जाता है क्योंकि गुरु अमृत की खान होते हैं। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर नागेंद्र पांडे अंजुम आरा अंजली कुमारी आयशा खातून खुशबू जिन्नत आदि शिक्षकों सहित विद्यालय के छात्र उपस्थित थे।

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