विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी ,पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने दिल्ली मुंबई मुख्य मार्ग पर बड़ोदरा से ६०कि०मी०दुरी पर, नर्मदा नदी के किनारे,स्थित पोइचा नगर में विश्वप्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन पुजन कर कहा कि -हमलोग श्री नीलकंठ वर्णींद्र भगवान स्वामी नारायण का दर्शन,पूजन एवं आरती में शामिल होकर धन्य हो गये हैं।
पूर्व प्राचार्य ने धर्माचार्य गण से संवाद कर बताया कि -इन मंदिरों के धाम का मूल उद्देश्य लोगों में शांति का संदेश देना है, धर्मशास्त्र सृष्टि की उत्पत्ति के समय बनाया जाता है और ईश्वर, जिसने सृष्टि रचना की, वही सृष्टि का ज्ञान दे सकता है।जहां निरोगी हो, मानसिक शांति हो, परिवार और समाज में प्रेम व भाईचारा हो, वहां सुख सम्पत्ति का वास होगा, समस्त कामनाओं की पूर्ति होगी, सब पुरूषार्थी होंगे और धन व वैभव के स्वामी भी होगें । आज सारा विश्व हिंसा, मारकाट, भुखमरी, अभाव, अशांति, अन्याय, शोषण का शिकार हो रहा है । अनेक पन्थों, ईश्वरवादीयों और अज्ञानी गुरूओं और जातियों में बंटा समाज आपसी घृणा और हिंसा से पीड़ित है । धर्म के नाम पर अधर्म पर चलने के कारण मानव ऊर्जा, समय और धन का दुरूपयोग हो रहा है । ऐसे में
वेद के अनुसार आचरण करते हुए तीर्थयात्रा करना श्रेष्ठ माना गया है।सब मनुष्य धर्मानुसार आचरण करें । सब काम धर्मानुसार, अर्थात् सत्य और असत्य का विचार करके करें । धर्म का मुख्य उद्देश्य मानव को सुख प्रदान करना है । धर्म मानव को महामानव बनाता हुआ, परम आनन्द मोक्ष तक पहुँचाता है ।
इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य पंडित रमाशंकर तिवारी, पंडित जलेश्वर तिवारी, सोनू कुमार तिवारी, आकाश मिश्र, दिव्यांश,प्रांश, आदि उपस्थित रहे।






