दोन की पीड़ा और कैलाश नगर की बेबसी लोकसभा में गूंजी, संसद तक पहुंची आवाज
दोन की सड़क-पुल से लेकर कैलाश नगर के आशियाने तक, संसद में उठा बगहा का सवाल
विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा/नई दिल्ली। वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार ने सोमवार को लोकसभा में नियम 377 के तहत अति लोक महत्व के विषय के रूप में रामनगर के दोन क्षेत्र और बगहा नगर के कैलाश नगर की गंभीर समस्याओं को उठाते हुए केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। सांसद ने दोनों क्षेत्रों के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पहल करने की मांग की।सांसद सुनील कुमार ने बताया कि वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र के थारू आदिवासी बहुल दोन क्षेत्र तथा बगहा नगर के कैलाश नगर से आए प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। प्रतिनिधिमंडल की ओर से दोनों क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी।
लोकसभा में मुद्दा उठाते हुए सांसद ने कहा कि दोन क्षेत्र के निवासी वन विभाग के अव्यावहारिक कानूनों और नियमों के कारण सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझ रहे हैं। क्षेत्र की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए वन कानूनों के प्रावधानों में मानवीय आधार पर आवश्यक शिथिलता देने की जरूरत है, ताकि यहां रहने वाले लोगों को सामान्य जीवन जीने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी दोन क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को स्थानीय लोगों की जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशना चाहिए।
वहीं, सांसद ने बगहा नगर परिषद क्षेत्र के कैलाश नगर की समस्या को भी लोकसभा में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि कैलाश नगर में रेलवे की जमीन पर कटाव पीड़ित लोग लंबे समय से रह रहे हैं। जमीन की स्थिति के कारण इन परिवारों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र, आवास, शौचालय सहित कई व्यक्तिगत सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे बड़ी संख्या में परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कैलाश नगर के कटाव पीड़ित परिवारों की स्थिति को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए उनके पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था के लिए आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किया जाना चाहिए।






