Friday, September 25, 2026
No menu items!
Google search engine
Home आस पास वैज्ञानिक तकनीक से केले की खेती से आएगी समृद्धि, किसान होंगे मालामाल

वैज्ञानिक तकनीक से केले की खेती से आएगी समृद्धि, किसान होंगे मालामाल

0
15

अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण, बिहार

किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में केले की खेती वरदान साबित हो रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक तरीके को छोड़कर वैज्ञानिक तकनीक से केले की खेती करें तो कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि G-9, अल्पान जैसी टिश्यू कल्चर किस्में लगाने से पौधे रोगमुक्त रहते हैं और उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक होता है। केले का रोपण जून-जुलाई और फरवरी-मार्च में करना सर्वोत्तम होता है। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 1.8 x 1.8 मीटर रखनी चाहिए। बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति (ड्रिप इरिगेशन) से पानी की 40% बचत होती है और फर्टिगेशन के माध्यम से उर्वरक सीधे जड़ तक पहुंचता है। मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है।फसल उत्पादन के वैज्ञानिक डॉ. हर्षा बी. आर. ने बताया कि मिट्टी जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ-साथ जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग लाभदायक है।

पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दुबे ने बताया कि केले में पनामा विल्ट और सिगाटोका प्रमुख रोग हैं। इसके नियंत्रण के लिए रोग-रोधी किस्मों और ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक फफूंदनाशकों का प्रयोग करना चाहिए। केले में स्कारिंग बीटल से बचाव हेतु गुच्छे (बंच) को प्रोपलीन बैग से कवर करना चाहिए, जिससे कीट से बचाव के साथ-साथ केले में चमक भी आती है और उसका बाजार भाव भी अच्छा मिलता है। डॉ. सिंह के अनुसार, एक हेक्टेयर में केले की वैज्ञानिक खेती से किसान एक साल में 4 से 5 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। साथ ही केले के तने से रेशा और पत्तों से दोना-पत्तल बनाकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त की जा सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!