विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
प्रख्यात पर्यावरण विद् एवं पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर सजे विभिन्न पंडालों का भ्रमण करने के बाद शुभाश्रम में चर्चा करते हुए कहा कि -जन्माष्टमी महोत्सव में कृष्ण की पूजा करने के साथ-साथ उन्हें समझिए भी।क्योंकि हम जिस कृष्ण को जानते हैं—माखन, बांसुरी और राधा वाले कृष्ण!वो उनकी जीवन या यूं कहें, कि बालज़ीवन का सिर्फ एक हिस्सा है।

असली कृष्ण वो हैं, जिन्होंने बिना हथियार उठाए महाभारत की दिशा बदल दी। और शायद आज हमें उसी कृष्ण को समझने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
कब शांत रहना है।कब बोलना है।कब पीछे हटना है।और कब सही के लिए पूरी ताकत से खड़ा होना है।यही कृष्ण की वो सीख है, जो जन्माष्टमी के शोर में अक्सर पीछे छूट जाती है।इसलिए जन्माष्टमी को सिर्फ व्रत, पूजा और उत्सव तक मत रुकिए।
एक बार खुद से पूछिए—
क्या मैं कृष्ण को सिर्फ पूजता हूं, या उनके विचारों को अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश भी करता हूं ? उन्होंने आगे कहा कि कंस को मारने के बाद कृष्ण अपने माता-पिता वासुदेव और देवकी को मुक्त करने के लिए जेल गए! देवकी ने कृष्ण से पूछा पुत्र! तुम स्वयं महान भगवान हो कंस को मारने और हमें मुक्त करने के लिए आपने 14 वर्षों तक प्रतीक्षा क्यों कि? कृष्ण ने उत्तर दिया माता श्री आपने मुझे पिछले जन्म में 14 वर्षों के लिए वन क्यों भेजा, किस कारण से? देवकी ने कहा कि तुम ऐसा क्यों कहते हो कि मैं तुम्हें वन भेजी।

यह असंभव है! तब कृष्ण ने कहा कि आप भूल गई हो कि पिछले जन्म में आप कैकेई थीं और आपके पति दशरथ थे। देवकी अवाक रह गईं और जिज्ञासा से पूछा इस जीवन में कौशल्या कौन हैं ? कृष्ण ने उत्तर दिया माता यशोदा! आज ही के दिन नंद पत्नी यशोदा के गर्भ से योगमाया का भी जन्म हुआ, जो भगवान की शक्ति होने के कारण उनकी समान जन्म रहित हैं।






