विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी,देवभूमि देवरिया में देवभाषा सेवी ब्राह्मण कल्याण परिषद ने लंबे आर्थिक संघर्ष के बाद ब्राह्मण छात्रावास की आधारशिला पूजन कार्यक्रम मंत्रोच्चारण के साथ पूरा किया। इस अवसर पर डॉ मधुसूदन मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में श्रेष्ठ विद्वानों की एक गोष्ठी हुई। जिसमें संस्कृत दिवस मनाने की योजना बनाई गई।
गोष्टी को संबोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने क्या कहा–
संस्कृत भारतीय भाषा की जननी और ज्ञान की भाषा है। जिसकी परंपरा किसी एक धर्म, संप्रदाय या देवता तक सीमित नहीं रही। यह संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप की ज्ञान परंपरा की संवाहक रही है। इसमें ज्ञान का सृजन, परिष्कार, संरक्षण और प्रसार होता है ।इस बार कल 28 अगस्त को अर्थात प्रतिवर्ष की भांति श्रावण मास की पूर्णिमा रक्षाबंधन के अवसर पर हम संस्कृत दिवस मनाएंगे।

संस्कृत के प्रति सम्मान और प्रचार प्रसार को समर्पित यह दिवस नई पीढ़ी को भारत की प्राचीन भाषा का साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का अवसर भी है। पुराणों ने जनसाधारण को धार्मिक जीवन को दिशा दी। खगोल, भूगोल, इतिहास में समाज का ज्ञान जन सुलभ बनाया। वहीं नीति शास्त्रों ने नैतिक आचरण की कसौटियां तय कीं।
वक्ताओं ने कहा कि-
संस्कृत साहित्य जीवन को समझने और अधिक सार्थक बनाने वाली ज्ञान संपदा के रूप में सामने आता है। कालिदास भवभूति और बाणभट्ट की रचनाएं इसकी साहित्यिक समृद्धि की परिचायक हैं। पाणिनि की अष्टाध्याई में व्याकरण का वैज्ञानिक अनुशासन तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राज्य व्यवस्था अर्थनीति कूटनीति और न्याय का गहन चिंतन मिलता है।

इस अवसर पर आद्या प्रसाद शुक्ला, गिरीश चंद तिवारी, डॉक्टर शलभ मणि त्रिपाठी, डॉक्टर मकसूदन मिश्र, बृजेश कुमार पांडेय राहुल मणि, अनिल मणि, रमेश मिश्रा, विपिन बिहारी शुक्ला, दिनेश कुमार गुप्ता सहित सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।






