विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी, सारस्वत साधकों के परम पूज्य, भक्त शिरोमणि, प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त, लोक मंगल के साधक, वंदनीय ,गोस्वामी तुलसीदास जी के प्रादुर्भाव दिवस पर पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय की अध्यक्षता में विद्वत जनों की एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी और वंदे मातरम! संदर्भ में -वंदेमातरम् अर्थात जगन्माता से श्रेयत्व प्राप्त करने की हमारे यहां परंपरा बहुत प्राचीन है। गोस्वामी जी ने आदि शक्ति की वंदना अनूठे रूप में वाम भाग में स्थित अद्वितीय, अलौकिक, हृदय- देवी के रूप में की है —
वाम भाग शोभती अनुकूला, आदि- शक्ति छवि-निधि जग-मूला!
रामचरितमानस में बाबा तुलसी श्री राम की वंदना करते हुए राम नाम की महिमा और महत्व का अद्भुत विवरण प्रस्तुत किया है।राम नाम वह महामंत्र है जिसे श्री शंकर जी निरंतर जपते रहते हैं जो की जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त होने के लिए सबसे आसान ज्ञान है। राम नाम की महिमा को श्री गणेश जी जानते हैं,जिनके प्रभाव के कारण ही सर्वप्रथम पूजित होते हैं। इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य पंडित रमाशंकर त्रिपाठी, पंडित जलेश्वर त्रिपाठी, महंत रामदास सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।






