अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण
मझौलिया। मझौलिया अंचल क्षेत्र में दाखिल-खारिज और लगान रसीद काटने के नाम पर कथित तौर पर अवैध वसूली तथा फर्जी लगान रसीद जारी करने का मामला सामने आया है। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब कुछ भूमि धारक यूरिया खाद लेने के लिए दुकानदार के पास पहुंचे। किसानों ने नियमानुसार आधार कार्ड, किसान पंजीकरण और जमीन की लगान रसीद की छायाप्रति प्रस्तुत की। दुकानदार द्वारा रसीद का ऑनलाइन सत्यापन किए जाने पर संबंधित रसीद कंप्यूटर पर प्रदर्शित नहीं हुई। इसके बाद किसानों के बीच हड़कंप मच गया। मामले को लेकर जाकिर हुसैन, मोहम्मद इनायतुल्लाह, संजय पंडित, नूर मोहम्मद, मोहम्मद असलम, अली अख्तर, रईसुल आजम, अब्दुल वहाब, शेख शकील अहमद, जैइमा खातून, रघुपति शाह सहित दर्जनों भूमि धारकों ने कथित अटॉर्नी दौलत मुखिया के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि करीब पांच वर्ष पूर्व उनसे दाखिल-खारिज कराने और लगान रसीद कटवाने के नाम पर कथित तौर पर मनमाने तरीके से राशि वसूली गई थी। इसके बाद उन्हें अंचल कार्यालय की मुहर लगी लगान रसीद भी दी गई, लेकिन अब सत्यापन में उक्त रसीदें फर्जी बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कथित अटॉर्नी ने कई लोगों से राशि लेने के बावजूद उनके कार्य पूरे नहीं कराए। आरोप यह भी है कि जमीन से संबंधित अभिलेखों के संबंध में भी उन्हें परेशान किया गया। किसानों का कहना है कि जब वे अपने काम और दस्तावेजों के बारे में जानकारी लेने जाते हैं तो तरह-तरह के बहाने बनाए जाते हैं।

इस मामले में ग्रामीण जाकिर हुसैन ने मझौलिया थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे भू-धारकों ने अंचल प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर अंचलाधिकारी डोली कुमारी ने कहा कि आवेदन प्राप्त होते ही जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, थानाध्यक्ष अमर कुमार ने बताया कि आवेदन प्राप्त हुआ है और उसके आलोक में अनुसंधान शुरू कर दिया गया है। मामले ने अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर दाखिल-खारिज और लगान रसीद के नाम पर कथित वसूली की गई तथा अंचल कार्यालय की मुहर लगी रसीदें जारी की गईं, तो इसकी जानकारी संबंधित प्रशासन को क्यों नहीं हुई? आखिर कथित तौर पर अंचल की मुहर और लगान रसीद किस माध्यम से उपलब्ध हुई, यह जांच का विषय है।हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस और अंचल प्रशासन द्वारा जांच शुरू किए जाने के बाद भू-धारकों को कार्रवाई की उम्मीद है। फर्जी दस्तावेजों के कारण ऑनलाइन राजस्व प्रक्रिया में भूमि धारकों को हो रही परेशानी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।






