विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
वाल्मीकिनगर। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बेलवा घाट परिसर में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 157वीं नारायणी गंडकी महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि थरुहट के निर्माता एचेल थारू, विशिष्ट अतिथि सत्येंद्र सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी संगीत आनंद, सुमन सिंह, कामेश्वर श्रीवास्तव, वरिष्ठ कलाकार शिवचंद्र शर्मा, पिंकी देवी, पूनम देवी, कुमारी संगीता, अरविंद अकेला, डॉ. नंद महतो, गायक चंद्रिका प्रसाद खतईत एवं बाल मोहन दास उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि एचेल थारू ने कहा कि पौधा वितरण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना समय की आवश्यकता है। वहीं विशिष्ट अतिथि सत्येंद्र सिंह ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है। समाजसेवी संगीत आनंद ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं तथा माता-पिता जीवन के प्रथम गुरु होते हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्वरांजलि सेवा संस्थान एवं हरे कृष्णा मंडली द्वारा गुरु पूर्णिमा पर आधारित भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। गायक संगीत आनंद एवं राजा कुमार ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा, पूजा एवं हवन के माध्यम से विश्व शांति की कामना की गई।

महाप्रसाद की व्यवस्था होटल पूर्वा के प्रबंधक चंदन जायसवाल एवं रुद्र नेचुरल साबुन-शहद उद्योग द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन संगीत आनंद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिवचंद्र शर्मा एवं कामेश्वर श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान भीखम दास, सरिता देवी, आचार्य पंडित अनिरुद्ध द्विवेदी, सच्चिदानंद तिवारी, निक्की तिवारी, अर्पिता कुमारी एवं रितिका कुमारी की भूमिका सराहनीय रही।

कार्यक्रम स्थल “गंगा मैया की जय”, “सदगुरु देव महाराज की जय” जैसे जयघोषों से गुंजायमान रहा। अंत में स्वामी कमलनयन आचार्य, उपेंद्र पाराशर, स्वामी कृष्ण प्रपन्नाचार्य, आचार्य अखिलेश्वर पांडे, गुरु वशिष्ठ जी, विनय बिहारी, स्वामी चैतन्य कृष्ण, पवन भट्टराई सहित अन्य संतों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।






