वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकि नगर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। अस्पताल परिसर की चारदीवारी का एक बड़ा हिस्सा वर्षों से टूटा हुआ है, जिसके कारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से निकलकर जंगली जानवर अक्सर अस्पताल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे रात में इलाज के लिए आने वाले मरीजों, उनके परिजनों तथा अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार टूटी हुई चारदीवारी के रास्ते हिरण,तेंदुआ, भालू,जंगली सूअर समेत अन्य वन्यजीव कई बार अस्पताल परिसर में देखे जा चुके हैं। वन क्षेत्र से सटे होने के कारण कभी भी कोई हिंसक वन्यजीव परिसर में पहुंच सकता है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रात्रि के समय अस्पताल में भर्ती मरीजों और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को हर समय भय के माहौल में काम करना पड़ता है। कई बार जंगली जानवरों के परिसर में आने से अफरा-तफरी की स्थिति भी बन चुकी है। इसके बावजूद अब तक चारदीवारी की मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल की टूटी चारदीवारी का मुद्दा कई बार अखबारों की सुर्खियां बन चुका है। जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर आकृष्ट कराया गया, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से अस्पताल परिसर की चारदीवारी का अविलंब पुनर्निर्माण कराने, सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी मांग की है ।






