थक चुके थे कदम, टूट रही थी उम्मीद… RO रवि प्रकाश चौधरी ने दिलाई राहत

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बुजुर्ग के चेहरे पर लौटी मुस्कान

विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

बगहा-2 सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते एक बुजुर्ग की उम्मीद लगभग टूट चुकी थी। हर दिन यही आस होती कि शायद आज दाखिल-खारिज का काम हो जाएगा, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद मामला लंबित ही रहा।
आखिरकार जब यह मामला बगहा-2 अंचल के राजस्व पदाधिकारी रवि प्रकाश चौधरी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे सिर्फ एक फाइल नहीं, बल्कि एक जरूरतमंद बुजुर्ग की परेशानी के रूप में देखा। उन्होंने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई और बिना अनावश्यक देरी के दाखिल-खारिज का निष्पादन सुनिश्चित कराया। जैसे ही बुजुर्ग को अपने वर्षों से अटके काम के पूरा होने की सूचना मिली, उनके चेहरे पर राहत और संतोष की मुस्कान लौट आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि रवि प्रकाश चौधरी की कार्यशैली केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय भी है।

उनकी संवेदनशीलता ने यह भरोसा दिलाया कि अगर अधिकारी चाहें, तो आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव है। इस दौरान राजस्व पदाधिकारी ने बुजुर्ग को यह भी समझाया कि सरकारी काम के लिए किसी दलाल या बिचौलिये को पैसे देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिहार सरकार की “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” नीति के तहत हर पात्र व्यक्ति का काम पारदर्शिता और नियमों के अनुसार किया जाता है।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि कोई सरकारी काम के नाम पर पैसे मांगता है, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। यह घटना सिर्फ एक दाखिल-खारिज के निष्पादन की नहीं, बल्कि उस भरोसे की वापसी की कहानी है, जो लंबे समय से परेशानियों के बीच कहीं खो गया था।

1 thought on “थक चुके थे कदम, टूट रही थी उम्मीद… RO रवि प्रकाश चौधरी ने दिलाई राहत”

  1. DCLR और अनुमंडल पदाधिकारी के तीन तीन बार अतिक्रमण मुक्त कराने के आदेश के बाद भी बगहा 2 के सी ओ साहब और R O साहब विफल हो गये इसको क्या कहेंगे भ्रस्टाचार चरम पर है

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