ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में ऐतिहासिक फैसला: बगहा व्यवहार न्यायालय ने सुनाई आजीवन कारावास

0
FB_IMG_1784010310741.jpg

विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

बेतिया, पश्चिम चंपारण: मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध के खिलाफ एक कड़ा और ऐतिहासिक संदेश देते हुए अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, बगहा ने पहली बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में पश्चिम बंगाल के एक माता-पुत्र को दोषी करार देते हुए न्यायालय ने उन्हें उम्रकैद के साथ-साथ एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। न्यायालय के आदेशानुसार, यदि दोषी अर्थदंड का भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। बताया जा रहा है कि बिहार में मानव तस्करी के मामले में यह पहली बार है जब किसी अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

यह फैसला जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र की अदालत द्वारा सुनाया गया। दोषियों की पहचान पश्चिम बंगाल के पश्चिम वर्दमान जिला अंतर्गत कमरदंगा हरिपुर (थाना अंडाल) निवासी 43 वर्षीय नियोति देवी और उनके 19 वर्षीय पुत्र नागेश भुइंया के रूप में हुई है।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दिनांक 22 जनवरी 2026 को मानव तस्करी निरोधक इकाई और नौरंगिया थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दोनों आरोपियों को तीन अवयस्क किशोरियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी किशोरियों को बगहा से पश्चिम बंगाल के आसनसोल ले जाने की फिराक में थे।पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बगहा से आसनसोल तक के रेल टिकट समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए। वहीं आयु सत्यापन में तीनों किशोरियां अवयस्क पाई गईं, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया।

सख्त संदेश:


इस फैसले को मानव तस्करी के खिलाफ एक मजबूत न्यायिक कदम माना जा रहा है, जो अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है कि ऐसे जघन्य अपराध में अब सख्त सजा तय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!