विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा/ वन प्रक्षेत्र हरनाटांड़ के कुनई नाका एवं एपीसी बरवा से दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों को हटाए जाने के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस मामले को लेकर वन कर्मचारी संघ ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संघ का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के वर्षों से कार्यरत कर्मियों को सेवा से हटा दिया गया, वहीं पिछले छह माह से लंबित मानदेय का भुगतान भी नहीं किया गया है। वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय कुमार राम और जिला मंत्री जय प्रकाश कुमार के नेतृत्व में 26 व 27 जून को एक शिष्टमंडल हरनाटांड़ रेंज कार्यालय पहुंचा था। संघ का आरोप है कि रेंज अधिकारी शिवकुमार राम ने प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों के अनुसार उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि “जो करना है, कर लो, हम वार्ता नहीं करेंगे।” संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि हटाए गए कर्मचारी वर्षों से वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा में दिन-रात लगे रहे, लेकिन अब उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। छह महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मियों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक प्रभावित हो गया है, वहीं कई लोग कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।

इसी क्रम में 29 जून को सुबह 9 बजे से रेंज कार्यालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें लंबित मानदेय भुगतान और हटाए गए कर्मियों की बहाली की मांग दोहराई गई। हालांकि, विभाग की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।वन कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि 2 जुलाई को वन प्रमंडल-1, 2 और 3 के वरीय अधिकारियों से वार्ता का प्रयास किया जाएगा। यदि समाधान नहीं निकला तो 3 जुलाई से बेतिया स्थित वन विभाग कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।वहीं, इस संबंध में हरनाटांड़ रेंजर शिवकुमार राम ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर कुछ दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को हटाया गया है।






