वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि पर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक बार फिर पर्यटकों के लिए रोमांच और उत्साह का केंद्र बन गया। बुधवार की शाम गोपालगंज से पहुंचे पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान जंगल क्षेत्र में बाघ का दीदार हुआ। बाघ को इतने करीब और खुले क्षेत्र में विचरण करते देख पर्यटक रोमांचित हो उठे और इस यादगार पल को अपने कैमरों व मोबाइल फोन में कैद करते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, सुवांश कुमार एवं उनके फैमिली जंगल सफारी के लिए वाल्मीकि नगर पहुंची थी। जंगल सफारी के दौरान नेचर गाइड और चालक की मदद से पर्यटकों को बाघ देखने का दुर्लभ अवसर मिला। पर्यटकों ने बताया कि बाघ बेहद शांत अंदाज में जंगल के खुले हिस्से में धीरे-धीरे चलता दिखाई दिया। जंगल सफारी के दौरान सुवांश ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे पहली बार वाल्मीकि नगर घूमने आए थे और उनकी सबसे बड़ी इच्छा बाघ देखने की थी, जो पूरी हो गई।

उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया है। जंगल की हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और बाघ की शाही मौजूदगी ने पूरे माहौल को रोमांच से भर दिया।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, भालू, गौर, गेंडा ,सांभर और हिरण की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। हालांकि पर्यटकों को अक्सर हिरणों के झुंड और अन्य वन्यजीव दिखाई दे जाते हैं, लेकिन बाघ का दर्शन बेहद दुर्लभ माना जाता है।
लगातार हो रही टाइगर साइटिंग से जंगल में बाघों की सक्रियता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिसे वन्यजीव संरक्षण के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में पर्यटक वाल्मीकि नगर पहुंच रहे हैं। इस बार कुछ विदेशी पर्यटक भी यहां आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की पहचान और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों के आगमन से स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ मिल रहा है।






