विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा। वाल्मीकि की तपोभूमि कहे जाने वाले बगहा पुलिस जिला के कैलाश नगर स्थित बजरंग व्यामशाला का अखाड़ा पिछले 25 वर्षों से पहलवानों की पहचान गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कैलाश्वा बाबा मंदिर के समीप नदी तट पर संचालित इस अखाड़े में दूर-दूर से युवा आकर कुश्ती की बारीकियां सीखते हैं और अपने हुनर को निखारते हैं। अखाड़ा के संचालक गुरु छोटेलाल दास बाबा पहलवान ने बताया कि इस व्यामशाला से जुड़े पहलवान पहले भी वाराणसी, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और नेपाल जैसे विभिन्न स्थानों पर दंगलों में भाग लेकर जीत हासिल कर चुके हैं।

यहां चंपारण सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा पहलवान बनने का सपना लेकर आते हैं, जिन्हें गुरु द्वारा पारंपरिक कुश्ती की उत्कृष्ट ट्रेनिंग दी जाती है। गुरु छोटेलाल दास बाबा ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में जहां पारंपरिक खेल धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं, वहीं उनका प्रयास है कि कुश्ती जैसे प्राचीन खेल को जीवित रखा जाए और नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए। उनके मार्गदर्शन में युवा न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बन रहे हैं, बल्कि अनुशासन और संघर्ष की सीख भी ले रहे हैं।

अखाड़े में अभ्यास कर रहे पहलवान—डब्लू उपाध्याय, दिनेश यादव, सोनू, उत्तम, टीटू, कुनाल, राजू, नवीन पांडेय, सत्यम, कुंदन, विवेक और गोलू ने बताया कि गुरुजी के अथक प्रयासों और बेहतर प्रशिक्षण के कारण उन्हें बड़े-बड़े दंगलों में भाग लेने का अवसर मिलता है। सभी पहलवानों ने एक स्वर में कहा कि अखाड़े में मिली शिक्षा और अनुभव उनके भविष्य को नई दिशा दे रही है।






