विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने देवरिया स्थित बारीपुर धाम में उत्तराधिकारी पीठाधीश्वर महंत गोपाल दास जी द्वारा आयोजित शिवमहापुराण कथा यज्ञ में सम्मिलित होकर रघुनंदन महाराज जी के मुखारविंद से अमृत कथा का रस पान करते हुए कहा कि -हमलोग कत्तई अच्छे नहीं हैं! अच्छा बनना है, तो संतों के शरण में आना होगा। पुरुषोत्तम मास में हो रही शिवमहापुराण कथा की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जो प्रमाद से इस समय को खाली बिता देते हैं, उनका जीवन मनुष्यलोक में दारिद्रय, पुत्रशोक तथा पाप के कीचड़ से निंदित हो जाता है इसमें संदेह नहीं है।

‘हे महादेव ! हे प्रलय और उत्पत्ति करने वाले ! हम सभी पर दया करके पुरुषोत्तम मास के व्रत की कृपा से दारिद्रय, पुत्रशोक और वैधव्य का नाश करें। इसके व्रत से ब्रह्महत्या आदि सब पाप नष्ट हो जाते हैं।
विधिवत् सेवते यस्तु पुरुषोत्तममादरात्।*
*फुलं स्वकीयमुदधृत्य मामेवैष्यत्यसंशयम्।।
प्रति तीसरे वर्ष में पुरुषोत्तम मास के आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ व्रत, उपवास, पूजा आदि शुभकर्म करता है, वह निःसन्देह अपने समस्त परिवार के साथ बैकुंठ लोक में पहुंचकर प्रभु सान्निध्य प्राप्त करता है।”
*इस मास में आंवले और तिल का उबटन शरीर पर मलकर स्नान करना और आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करना, भगवान श्री पुरुषोत्तम को अतिशय प्रिय है, साथ ही स्वास्थ्यप्रद और प्रसन्नताप्रद भी है। यह व्रत करने वाले लोग बहुत पुण्यवान हो जाते हैं।

इस मास में उक्त सभी सकाम कर्म एवं व्रत वर्जित हैं। जैसे – कुएँ, बावली, तालाब और बाग आदि का आरम्भ तथा प्रतिष्ठा, नवविवाहिता वधू का प्रवेश, देवताओं का स्थापन (देवप्रतिष्ठा), यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, नामकर्म, मकान बनाना, नये वस्त्र एवं अलंकार पहनना आदि।उन्होंने आगे बताया कि प्राणघातक रोग आदि की निवृत्ति के लिए रूद्रजप आदि अनुष्ठान, दान व जप-कीर्तन आदि, पुत्रजन्म के कृत्य, पितृमरण के श्राद्धादि तथा गर्भाधान, पुंसवन जैसे संस्कार किये जा सकते हैं।
इस अवसर पर अब्दुल रशीद उर्फ छोटे, शिबू, दिनेश कुमार गुप्ता,लल्लन प्रसाद,आकाश सिंह, नीरज शांडिल्य, सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।







