विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मां सिर्फ जन्मदात्री ही नहीं होती, मां सबसे अच्छी मित्र भी होती है और सबसे पहली गुरु भी! किसी भी बच्चे को 6 साल की उम्र तक जीवन का 90% ज्ञान अर्जित हो जाता है। वह ज्ञान तो अधिकांशतः मां ही देती है ।सभी गुरुओं में माता सर्वश्रेष्ठ गुरु है। माता रूपी इस गुरु की महिमा यह भी है कि वह गोविंद भी दिखाती है और दूसरों के अंदर बसे मातृभाव से परिचय भी कराती है।मदर डे का मतलब है अपनी मां के पास बैठिए और बिना मां के बोले आप खुद एहसास कीजिए और समझने की कोशिश कीजिए कि हमारी मां को क्या अच्छा लगता हैं और क्या बुरा लगता है।

हमको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए हमारी मां के दिल में क्या है वो क्या पसंद करती है हम लोगों से मां के मन में उम्मीदें क्या हैं क्या हम आज इस चकाचौंध और AI की दुनिया में अपनी मां को और उसकी पसंद को भूल तो नहीं गए हैं ।मां जब तक जिंदा है तब तक मां के लिए जरूर कुछ न कुछ कीजिए। नहीं तो मरने के बाद आप चाहे जो भी करेंगे क्या पता उसको क्या मिलेगा और नहीं मिलेगा। मां को अपने पास रखिए चाहे सुख हो या दुख हो घर छोटा हो या बड़ा हो आनंद हो या परेशानी हो ।क्योंकि इन सभी परिस्थितियों में रहकर मां ने भी हमको अपने पास रखा है और पाल पोसकर बड़ा किया है ।
अगर आप समर्थवान हैं तो अपनी मां के नाम पर मां के हाथों से दान कीजिए धर्म कीजिए और कुछ सेवा कार्य कीजिए और दूसरों की मां के लिए भी कुछ ऐसा कीजिए कि वह सोचे की कास मेरा भी बेटा ऐसा होता।
मां के हाथों से या मां के नाम पर भी कुछ सेवा और धर्म का कार्य करना भी मदर डे जैसा है ।






