विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने भगवान परशुराम के तैल चित्र पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है।इसी दिन से आरंभ हुआ था, त्रेता युग!इस दिन कोई भी शुभ काम करने के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती। विवाह के लिए भी ये दिन सर्वोत्तम शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन किये गये कार्य अक्षय और सफल होते हैं और उनमें किसी भी तरह की बाधाएं नहीं आती।भगवान विष्णु के छठे अवतार श्री परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया को ही हुआ था।त्रेतायुग का प्रारंभ भी इसी दिन हुआ था।भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण और हयग्रीव का अवतरण भी इसी तिथि में हुआ माना जाता है।वेद व्यास एवं श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रन्थ के लेखन का प्रारंभ भी इसी तिथि से हुआ था।और ये महाभारत काल का समापन दिन भी माना जाता है।द्वापर युग का समापन भी अक्षय तृतीया पर हुआ माना गया है।माँ गंगा का धरती पर आगमन इस शुभ तिथि पर ही हुआ था।भक्तों के लिए तीर्थस्थल श्री बद्रीनाथ के कपाट भी इसी तिथि को खोले जाते हैं। इस दिन श्री विष्णुजी और माँ लक्ष्मी का किया गया जप, पाठ और दान अक्षय हो जाता है। इसका कभी क्षय नही होता।शास्त्रों में अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। अक्षय तृतीया के दिन मांगलिक कार्य जैसे-विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार अथवा उद्योग का आरंभ करना अति शुभ फलदायक होता है।

अक्षय तृतीया का विशेष महत्व-.है“न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।*न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगयां समम्।।”वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया के समान कोई तिथि नहीं है।अक्षय तृतीया के विषय में मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है वह अक्षय हो जाता हैं। और उसमें बरकत होती है। यानी इस दिन जो भी अच्छा काम करेंगे उसका फल कभी समाप्त नहीं होगा अगर कोई बुरा काम करेंगे तो उस काम का परिणाम भी कई जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ेगा।धरती पर भगवान विष्णु ने 24 रूपों में अवतार लिया था। इनमें छठा अवतार भगवान परशुराम का था। पुराणों में उनका जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था।इस दिन धरती पर गंगा अवतरित हुईं।
इस अवसर पर श्री निवास मणि,जय प्रकाश मिश्र, अम्बरीष मणि, उपेंद्र मिश्रा, जितेंद्र त्रिपाठी, विकास उपाध्याय,अजय मिश्रा और दिनेश कुमार गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए।






