Friday, June 5, 2026
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जन सुराज की जिला कार्यकारिणी कार्यशाला सह संगठनात्मक बैठक आयोजित

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अगर नेताओं का चेहरा देखकर वोट दीजिएगा, तो नेता का बेटा चाहे पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, स्वस्थ हो या अस्वस्थ, नेता का बेटा राजा बनेगा और आपके बच्चे मजदूर बनेंगे: प्रशांत किशोर

विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

बेतिया। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर गुरुवार को बेतिया पहुंचे। दरअसल, प्रशांत किशोर पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत बिहार के तमाम जिलों का दौरा कर रहे हैं। वे हर जिले में जाकर संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इसी क्रम में आज बेतिया में स्थित ‘मीना रेजिडेंशियल पैलेस’ में जन सुराज की जिला कार्यकारिणी कार्यशाला सह संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले की सभी सांगठनिक इकाइयों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज की जिला कार्यकारिणी की पहली बैठक में शामिल होने के लिए यहां आया हूं। जन सुराज के संगठन को पुनर्गठित करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले तीन-चार महीनों में हम लोग जन सुराज के विचार और बिहार बदलने के संकल्प को घर-घर लेकर जाएंगे। साथ ही एक निर्णय लिया गया है कि आने वाले समय में त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव में जिला परिषद, वार्ड सदस्य और पंच का चुनाव पार्टी अपने कार्यकर्ता साथियों को दल के झंडे के तहत लड़ाएगी।

वहीं, बांकीपुर उपचुनाव को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि बांनकीपुर का चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट है। पिछले 40 साल से वहां कोई दल या नेता भाजपा को हरा नहीं पाया है। जन सुराज का मानना है कि बांकीपुर का उपचुनाव सरकार के उन वादों पर रेफरेंडम होगा, जिन वादों को आधार बनाकर एनडीए ने बिहार की जनता को ठगा है। चाहे सरकार बनाने में 10 हजार रुपये का लालच देना या 2 लाख रुपये देने का वादा करके लोगों से वोट लिया गया हो, या फिर एक करोड़ रोजगार देने का वादा रहा हो। चाहे पलायन रोकने और शिक्षा व्यवस्था सुधारने की बात हो या भ्रष्टाचार बंद करने की। इन सारे वादों पर एक तरीके से जनता को अपना मत देने का अधिकार रेफरेंडम के तहत होगा। इसलिए जन सुराज पार्टी पूरी ताकत से बांकीपुर में चुनाव लड़ेगी, ताकि एनडीए ने बिहार के लोगों के साथ और बिहार में बदलाव चाहने वालों के साथ जो धोखा किया है, उसका समुचित जवाब बांकीपुर में हराकर उसे दिया जा सके।

मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के दिल्ली रवाना हो जाने के सवाल पर पीके ने कहा कि इसमें नई बात क्या है? बिहार ने उसी मुजफ्फरपुर में कुछ साल पहले एक बहुत बड़ा कांड देखा है, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे। क्या तब उन्होंने उस घटना पर कोई बयान दिया था? विधानसभा चुनाव के बाद अब तक अलग-अलग राज्यों में 55 से अधिक बिहारी नौजवानों और मजदूरों की जान जा चुकी है। क्या उस पर किसी ने कोई बयान दिया? पीके ने आगे सवाल करते हुए कहा कि बिहर में सैकड़ों पुल टूट रहे हैं, उस पर आपने सरकार का कोई बयान सुना? सरकार का बयान तो लाल गमछे और हरे गमछे पर है। सरकार का बयान जाति-धर्म पर है। सरकार का बयान जनता के मुद्दों पर नहीं है और इसके लिए सरकार और सरकार में बैठे हुए लोगों से ज्यादा आप और हम जिम्मेदार हैं, क्योंकि हम लोगों ने अपने बच्चों के लिए वोट नहीं दिया है। पिछले तीन साल से जन सुराज घूम-घूम कर यही बता रहा है कि अगर नेताओं का चेहरा देखकर वोट दीजिएगा, तो नेता का बेटा चाहे पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, स्वस्थ हो या अस्वस्थ, नेता का बेटा राजा बनेगा और आपके बच्चे मजदूर बनेंगे।

पीके ने नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि वे जीवनभर परिवारवाद पर भाषण देते रहे, लेकिन आज उनका बेटा स्वास्थ्य मंत्री है। उपेंद्र कुशवाहा का भी बेटा मंत्री है। लालू प्रसाद यादव का तो आधा खानदान ही सरकार में है। जीतन राम मांझी का भी पूरा खानदान ही सरकार में है। इसके लिए ये नेता दोषी नहीं हैं, बल्कि जनता दोषी है। क्योंकि आप और हम यह जानते हैं कि अगर इन्हें वोट देंगे, तो इन्हें समाज के लोगों से मतलब नहीं है, बल्कि अपने बच्चों और अपने परिवार की चिंता है। लोभी के गांव में ठग भूखा नहीं मर सकता। जब तक बिहार के लोग त्वरित लाभ का लोभ नहीं छोड़ेंगे, तब तक ठग नेता आपका शोषण करते रहेंगे।

वहीं, सम्राट चौधरी के फिजिक्स यूनिवर्सिटी वाले बयान पर तंज कसते हुए पीके ने कहा कि सम्राट चौधरी को यह नहीं पता है कि वे दसवीं कक्षा पास किए हैं या नहीं। उनको यह नहीं पता है कि उन्होंने पीएफसी कोर्स किया है या नहीं। लेकिन उनको पता है कि वे केमिस्ट्री और मैथमैटिक्स की यूनिवर्सिटी बिहार में खोलेंगे। आश्चर्य की बात यह है कि पूरी दुनिया में फिजिक्स या केमिस्ट्री की कोई यूनिवर्सिटी नहीं होती है। यह एक विषय है। इसका एक विभाग हो सकता है, स्कूल हो सकता है, कॉलेज हो सकता है। लेकिन वे यूनिवर्सिटी खोलेंगे। क्योंकि उनके पास ज्ञान भी अद्भुत है और डिग्री भी अद्भुत है। किसी दिन वे डी.लिट. कर लेते हैं, तो किसी दिन सातवीं फेल हो जाते हैं। वे तो अवतरित पुरुष हैं।

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