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शब-ए-बारात से पूर्व 481 तलबों ने किया हिफ़्ज़-ए-कुरआन मुकम्मल

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भव्य जलसे में दस्तारबंदी कर हाफ़िज़ों को किया गया सम्मानित

शादमान शकील हैदर बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा/पश्चिम चम्पारण में शब-ए-बारात के पावन अवसर से पूर्व पश्चिम चम्पारण जिले के सेमरा स्थित मदरसा में एक भव्य और रूहानी जलसे का आयोजन किया गया, जिसमें 481 तलबों द्वारा हिफ़्ज़-ए-कुरआन मुकम्मल किए जाने पर उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इस्लाम धर्म के पाक ग्रंथ कुरआन शरीफ को कंठस्थ याद करने वाले हाफ़िज़ों की दस्तारबंदी कर उन्हें सनद प्रदान की गई।


कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित उलेमा-ए-किराम ने शिरकत की। पटना, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ सीमावर्ती देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में उलेमा और धर्मगुरु जलसे में पहुंचे। जलसे का माहौल पूरी तरह से दीनी और रूहानी रंग में रंगा रहा।


दस्तारबंदी के दौरान हाफ़िज़ों के सिर पर पगड़ी बांधकर उन्हें सम्मानित किया गया, जिससे पूरे परिसर में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला। अकीदतमंदों की भारी भीड़ इस ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। जलसे को संबोधित करते हुए उलेमा-ए-किराम ने कहा कि कुरआन शरीफ सिर्फ पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि ज़िंदगी जीने का मुकम्मल दस्तूर है।

उन्होंने पैग़म्बर मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सीरत-ए-पाक से सबक लेने, आपसी भाईचारे, अमन और इंसानियत के रास्ते पर चलने की अपील की। उलेमा ने खास तौर पर युवाओं से तालीम के साथ-साथ अख़लाक़ और किरदार को मजबूत करने पर ज़ोर दिया।

जलसे के अंत में मुल्क और इंसानियत की भलाई के लिए दुआ की गई। इस आयोजन ने न सिर्फ मदरसे बल्कि पूरे इलाके में दीनी तालीम और कुरआन से जुड़ाव को एक नई ऊर्जा प्रदान की।

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