विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
पश्चिम चंपारण। जिले के बगहा स्थित अनुमंडलीय अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी व्यवस्था के तहत पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के बावजूद एक आशा कार्यकर्ता पर मरीज को बाहर से जेनेरिक दवा खरीदने के लिए मजबूर करने और जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर अवैध वसूली करने का आरोप लगा है। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पीड़ित मरीज की पहचान बगहा थाना क्षेत्र के अमौवलीय सिधाडी गांव निवासी छोटूराम की पत्नी दूरपती देवी के रूप में हुई है। पीड़ित के पति छोटूराम ने बताया कि उसी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता दुर्गावती देवी ने अस्पताल परिसर में इलाज के दौरान सरकारी दवाएं दिलाने के बजाय जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, नवजात के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर ₹400 की मांग भी की गई। मजबूरी में परिजन मानसिक दबाव में आ गए और मामले की जानकारी अस्पताल प्रबंधन तक पहुंची।

इस पूरे प्रकरण पर अनुमंडलीय अस्पताल में तैनात डॉक्टर के.बी.एन. सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल में इलाज, दवाइयां और जन्म प्रमाण पत्र समेत सभी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ आशा कार्यकर्ता कमीशन के लालच में मरीजों को गुमराह कर बाहर से जेनेरिक दवाएं खरीदने के लिए प्रेरित करती हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि मरीज द्वारा लाई गई प्राइवेट दवा डॉक्टर की पर्ची पर लिखी ही नहीं थी।डॉ. सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाएगी और दोषी आशा कार्यकर्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने मरीज को आवश्यक दैनिक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध करा दी हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। आम जनता का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में ही गरीब मरीजों से अवैध वसूली होगी तो स्वास्थ्य योजनाओं का क्या औचित्य रह जाएगा। लोगों ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई और अस्पताल व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।






