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अमरूद के गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन के लिए छात्रों ने सीखी एयर लेयरिंग तकनीक

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अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण, बिहार

कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर में पंडित दीन दयाल उपाध्याय बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, पिपराकोठी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा के छात्रों के लिए चल रहे **ग्रामीण उद्यानिकी कार्य अनुभव (आरएचडब्ल्यूई) कार्यक्रम [Rural Horticultural Work Experience (RHWE)] कार्यक्रम के अंतर्गत अमरूद के बाग में छात्रों को *एयर लेयरिंग (गूटी बांधने) तकनीक* का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान छात्रों ने कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के अमरूद बाग में एयर लेयरिंग की पूरी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अभ्यास किया। यह गतिविधि फसल उत्पादन विशेषज्ञ डॉ. हर्षा बी. आर. पर्यवेक्षण एवं डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के मार्गदर्शन में संपन्न कराई गई। छात्रों को बताया गया कि एयर लेयरिंग फलदार पौधों के वानस्पतिक प्रवर्धन की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसके माध्यम से मातृ पौधे की इच्छित विशेषताओं को बनाए रखते हुए कम समय में नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

छात्रों को बताया गया कि अमरूद में एयर लेयरिंग के लिए स्वस्थ एवं उपयुक्त शाखा का चयन किया जाता है। चयनित शाखा पर छाल की एक निश्चित पट्टी को हटाकर उस स्थान पर नम माध्यम, जैसे मॉस या उपयुक्त रूटिंग मीडिया, लगाया जाता है तथा इसे पॉलीथिन की सहायता से अच्छी तरह बांध दिया जाता है। उचित नमी एवं अनुकूल वातावरण मिलने पर कुछ समय बाद उस स्थान पर जड़ों का विकास होने लगता है। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को उपयुक्त शाखा का चयन, छाल हटाने, रूटिंग मीडिया लगाने, पॉलीथिन से बांधने तथा नमी बनाए रखने की तकनीक का प्रदर्शन किया गया। साथ ही, एयर लेयरिंग के लिए स्वस्थ एवं रोगमुक्त शाखा के चयन तथा प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता एवं नमी प्रबंधन के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।

छात्रों ने अमरूद के पौधों पर एयर लेयरिंग की प्रक्रिया को स्वयं करके देखा तथा विभिन्न चरणों का व्यावहारिक अभ्यास किया। इस गतिविधि के माध्यम से छात्रों को फलदार पौधों के वैज्ञानिक प्रवर्धन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई, जो भविष्य में गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन एवं बागवानी आधारित स्वरोजगार के लिए उपयोगी हो सकती है।

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