Wednesday, September 16, 2026
No menu items!
Google search engine
Home आस पास ऋषि पंचमी पर ऋषि-मुनियों के आदर्शों को अपनाने का लिया संकल्प —...

ऋषि पंचमी पर ऋषि-मुनियों के आदर्शों को अपनाने का लिया संकल्प — पं. भरत उपाध्याय

0
18

व्रती सुहागिनों ने निर्जल व्रत रख मांगा अखंड सौभाग्य

विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

बगहा। हरितालिका तीज, विनायकी श्रीगणेश चतुर्थी और ऋषि पंचमी के धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। महज दो दिनों के अंतराल में लगातार पड़ रहे इन महत्वपूर्ण पर्वों को लेकर महिलाओं एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं पूर्व प्राचार्य पं. भरत उपाध्याय ने बताया कि यह दुर्लभ संयोग है कि हरितालिका तीज के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने अखंड सौभाग्य एवं सुखी दाम्पत्य जीवन की कामना को लेकर निर्जल और निराहार व्रत रखा। वहीं, अविवाहित कन्याओं ने भी मनोवांछित एवं सुखी दाम्पत्य की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक व्रत किया। इसके साथ ही विनायकी श्रीगणेश चतुर्थी उत्सव का शुभारंभ हुआ और अब पावन ऋषि पंचमी पर्व भी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में ऋषि-मुनियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऋषियों ने अपने तप, ज्ञान और संस्कारों से समाज एवं संस्कृति को समृद्ध किया तथा सदैव सत्य, धर्म और सदाचार का मार्ग दिखाया। उनकी तपस्या एवं त्याग ने मानव जीवन को ज्ञान, संयम और सद्कर्मों की राह दिखाई। ऋषियों की वाणी और आदर्श आज भी समाज को सही दिशा देने में प्रकाश स्तंभ का कार्य करते हैं। पं. उपाध्याय ने ऋषि पंचमी के अवसर पर लोगों से अपने मन, वचन और कर्म को पवित्र रखने तथा सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि संस्कारों और सदाचार को जीवन में अपनाने से समाज में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का वातावरण कायम हो सकता है।

इधर, पर्व को लेकर नगर से लेकर गांव तक के प्रमुख मंदिरों में देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। सोलह श्रृंगार एवं पारंपरिक सुहाग के जोड़े में सुसज्जित महिलाएं मंदिरों में पहुंचीं और भगवान शिव-पार्वती एवं भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की। व्रती महिलाओं ने शिव-पार्वती की प्रतिमा पर सुहाग की सामग्री अर्पित कर अपने पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की कामना की। इस दौरान विभिन्न प्रकार के पकवान एवं व्यंजनों का भोग भी लगाया गया। मंदिरों में देर रात तक पूजा-अर्चना और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!