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संकीर्तन की मधुर ध्वनि से अहंकार का अंत होता है-पं०भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने बताया कि आज शुभाश्रम धाम मेंअंतर्राष्ट्रीय मानस वक्ता अखिलेश शांडिल्य की अध्यक्षता में हनुमान गढ़ी में आयोजित होने वाले नवाह् अनुष्ठान एवं प्रवचन कार्यक्रम की सफलता के लिए गणमान्य लोगों की एक आवश्यक बैठक सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर श्री शांडिल्य ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा मानवीय संघर्ष की छटाओं को समेटते हुए मर्यादाओं की स्थापना का प्रतिमान है।आम आदमी के लिए राम कथा सांस्कृतिक एकता का उत्सव है।जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधती है। विश्व कल्याण के लिए होने वाले नवाह् अनुष्ठान की स्थापना लगभग तीन दशक पूर्व द्विजेंद्र मणि त्रिपाठी उर्फ चुटकी बाबा ने की थी, जिसे आज भी विद्वान वक्ताओं के प्रवचन द्वारा श्री हनुमान जन्मोत्सव के साथ सम्पन्न किया जाता है।


पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने कहा कि सप्ताह भर चलने वाले इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजन के लिए सभी श्रेष्ठ राम भक्तों को आगे आना चाहिए। क्योंकि श्री राम जी कहते हैं- न मैं बैकुंठ में रहता हूं न योगियो के हृदय में।हे नारद मैं तो वहां निवास करता हूं, जहां मेरे भक्त मेरा संकीर्तन करते हैं।संकीर्तन केवल सूर और ताल का मेल नहीं है यह आत्मा की वह पुकार है जिसे सुनकर संकीर्तन का रसिया अपने भक्तों का सारा कष्ट हरने दौड़ते चला आता है।

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