विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा। आध्यात्मिक सेवा संघ एवं संस्कृत भारती के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम रविवार को बगहा स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में समारोहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश बगहा एडीजे मानवेंद्र मिश्रा, अनुमंडल पदाधिकारी चांदनी कुमारी, एसडीपीओ निहार भूषण, गोरख प्रसाद उपाध्याय, वन विकास भारती के संस्थापक अरुण कुमार सिंह एवं राकेश सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

मंच का संचालन परमानंद प्रकाश ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत पंडित रितेश एवं उनके सहयोगियों द्वारा प्रस्तुत वैदिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद सरस्वती शिशु मंदिर एवं सन फ्लावर चिल्ड्रेन्स एकेडमी की छात्राओं ने वंदन गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया। कई छात्र-छात्राओं ने संस्कृत भाषा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।

एडीजे मानवेंद्र मिश्रा ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। संस्कृत में हमारे वेद, उपनिषद, दर्शन और अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों का ज्ञान निहित है। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ा जाए और इसके अध्ययन के प्रति विद्यार्थियों में रुचि पैदा की जाए। ऐसे आयोजन संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अनुमंडल पदाधिकारी चांदनी कुमारी ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत का अभिन्न हिस्सा है। संस्कृत के माध्यम से बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। विद्यालयों में संस्कृत के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने और इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।

राकेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत भाषा को केवल पूजा-पाठ या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय इसे शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन से जोड़ने की आवश्यकता है। संस्कृत हमारी सभ्यता की जड़ों से जुड़ी भाषा है। यदि बच्चों और युवाओं को संस्कृत से जोड़ा जाए तो भारतीय संस्कृति और हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्रा, अनुमंडल पदाधिकारी चांदनी कुमारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी निहार भूषण, संस्कृत भारती पश्चिम चंपारण के जिलाध्यक्ष कृष्ण मोहन प्रसाद, मिथिलेश पाठक एवं सुबोध मणि त्रिपाठी को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में संस्कृत भाषा की महत्ता पर संवाद एवं संबोधन भी हुआ। वक्ताओं ने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।

समापन अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वाले मीडिया कर्मियों को भी अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। इस आयोजन में बाबा विश्वंभरनाथ शिव मंदिर प्रबंधक समिति बगहा को मंदिर के प्रति निस्वार्थ भाव सेवा करने और मंदिर के जीर्णोद्धार में अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया।






