घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वन विभाग बाघ को ट्रैक नहीं कर सका
ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से ग्रामीण से जंगल तथा उससे सटे क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के सीमावर्ती इलाकों में बाघ की बढ़ती चहलकदमी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। भेड़ीहारी गांव में किसान विजय हालदार की बाघ के हमले में मौत के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वन विभाग बाघ को ट्रैक नहीं कर सका है। बाघ लगातार अपना स्थान बदल रहा है, जिससे वन विभाग के सामने उसकी निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है।

खास बात यह है कि पिछले एक माह के भीतर बाघ के हमले में तीन लोगों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। शनिवार को वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने घटनास्थल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में माइकिंग कर लोगों को सावधान किया। ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से ग्रामीणों से जंगल तथा उससे सटे क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की गयी।

जंगल के आसपास बढ़ायी गयी गश्त
वन विभाग की टीमें क्षेत्र में लगातार गश्त कर बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। मैदानी वनकर्मियों को भी विशेष सतर्कता बरतने और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से बाघ की मौजूदगी वाले संभावित इलाकों की निगरानी बढ़ायी गयी है। रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से विशेष रूप से सुबह और शाम के समय अकेले खेतों या जंगल से सटे इलाकों में नहीं जाने की अपील की।
मवेशियों को जंगल में नहीं ले जाने की सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों को मवेशियों को जंगल में चराने के लिए नहीं ले जाने की सलाह दी है। रात के समय मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर बांधकर रखने को कहा गया है। विभागीय टीम लगातार गांवों में माइकिंग कर लोगों को बाघ की गतिविधियों के प्रति सचेत कर रही है।
कोर क्षेत्र में प्रवेश पर रोक वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वीटीआर के कोर वन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है। ग्रामीणों से कोर क्षेत्र में नहीं जाने तथा बफर क्षेत्र के जंगलों में भी अकेले जाने से बचने की अपील की गयी है। यदि किसी स्थान पर बाघ की मौजूदगी दिखाई देती है या उसकी गतिविधि की जानकारी मिलती है तो तत्काल वन विभाग को सूचित करने को कहा गया है।

विजय हालदार की मौत के बाद मानव-वन्यप्राणी संघर्ष का मुद्दा एक बार फिर गंभीर हो गया है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय है और अब निगाह इस बात पर टिकी है कि वन विभाग बाघ को कब तक ट्रैक कर पाता है। फिलहाल विभाग की निगरानी और ग्रामीणों की सतर्कता ही संभावित खतरे को टालने का सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है।






