बाल्मीकि नगर से नन्दलाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकिनगर। सावन के पावन महीने में वाल्मीकिनगर में मानवता और भावनाओं से जुड़ा एक ऐसा मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। करीब छह वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ा मानसिक रूप से अस्वस्थ एक व्यक्ति आखिरकार अपने परिजनों से मिल गया। संयोग ऐसा रहा कि परिवार के लोग भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने वाल्मीकिनगर पहुंचे थे और यहीं उनकी मुलाकात वर्षों से बिछड़े अपने परिजन से हो गई। जानकारी के अनुसार लौरिया थाना क्षेत्र के सिसवा बाजार निवासी वीरेंद्र राम, पिता उगर राम, करीब छह वर्षों से अपने परिवार से दूर थे। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह लंबे समय से इधर-उधर भटक रहे थे। परिवार के लोग भी उनकी तलाश और सुरक्षित वापसी की उम्मीद में थे। छह वर्षों का लंबा इंतजार उस समय खुशी में बदल गया, जब पत्नी घरभरनी देवी, बहन, भाई, भतीजा और पिता ने उन्हें वाल्मीकिनगर में पहचान लिया।

वीरेंद्र राम की मां लालमती देवी ने भावुक होकर कहा कि उनका बेटा भोलेनाथ के आशीर्वाद से छह वर्ष बाद मिला है। परिजनों के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था। वर्षों से जिस चेहरे को देखने के लिए परिवार तरस रहा था, वह अचानक उनके सामने था। एक-दूसरे को देखते ही परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पत्नी घरभरनी देवी ने इस मुलाकात को भगवान भोलेनाथ की कृपा बताया। उन्होंने कहा कि वे बाबा का जलाभिषेक करने वाल्मीकिनगर आए थे और इसी दौरान उन्हें अपना बिछड़ा हुआ परिजन मिल गया। सावन के महीने में हुई इस मुलाकात को परिवार ईश्वर का आशीर्वाद मान रहा है।
आ अब लौट चले, घर वापसी की तैयारी
परिजन अब वीरेंद्र राम को सुरक्षित उनके घर लौरिया के सिसवा बाजार ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं। इस नेक कार्य में स्थानीय लोगों और समाजसेवियों से सहयोग की अपील की गई है। वाल्मीकि सेवा दल के संतोष रौनियार ने लोगों से आग्रह किया है कि गोल चौक स्थित दादा होटल के पास पहुंचकर इस पुनीत कार्य में सहयोग करें, ताकि मानसिक रूप से अस्वस्थ वीरेंद्र राम को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके। छह वर्षों की दूरी के बाद परिवार से हुआ यह मिलन वाल्मीकिनगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि बिछड़े व्यक्ति को उसके अपनों तक पहुंचाना सिर्फ एक परिवार की मदद नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल भी है। सावन में हुआ यह मिलन परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।






