वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
भारत नेपाल सीमा को पंख लगाती तथा दोनों देशों को अपने मध्य धारा के सीमांकन से बांटने वाली एवं कुदरती अनुपम सौंदर्य को सहेज अपनी उफनती धाराओं से सहज तौर पर परिचय कराने वाली पावन सलिल नारायणी एवं वाल्मीकि ऋषि की तपोभूमि पर बसा वाल्मीकि नगर में कांवड़ियों के आगमन से वातावरण शिवमय हो गया है। श्रद्धालु भोले बाबा के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। मौका है सावन के पहली सोमवारी के लिए जलबोझी का। शिव भक्त पवित्र सोनहा नदी में स्नान कर जल भर रहे हैं। सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक के साथ वैदिक विधि- विधान से पूजन अर्चना कर सुख- समृद्धि व शांति का कामना करेंगे। जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा था शिव भक्तों का जमघट बढ़ता जा रहा था। जटाशंकर मंदिर व कालेश्वर धाम में श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। बाबा के दर्शन और पूजा के लिए शनिवार के देर रात से ही भक्तों का मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूरे मंदिर प्रांगण में हर- हर महादेव की जय घोष से गूंज उठा। चारों तरफ भोले बाबा के जयकारे लगा रहे हैं। जोशो-खरोश के साथ शिव भक्त जल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।

हजारों हजार की संख्या में कांवरियों ने गंडक नदी से जल भरा है। वाल्मीकि नगर श्रावणी मेले में हर साल शिव भक्तों की संख्या बढ़ रही है। श्रावण मास में भगवान भोले शंकर की आस्था शिव भक्तों को मिलो दूर पैदल जल लेकर जाने के लिए जोश भर्ती है। मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। वही सड़कों से निकल रहे कांवरियों के हुजूम से माहौल शिव में हो गया है। डीजे की धुन पर बजते शिव गीतों में श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना कर दिया। श्रद्धालुओं ने देवों के देव महादेव की पूजा अर्चना करने के साथ ही जलाभिषेक किया। भगवान शिव की आराधना करने से अक्षुग्य फल मिलता है। भोलेनाथ अपने भक्तों को मनोवांछित फल भी देते हैं।






