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बगहा में समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना के तहत हुआ वितरण कार्यक्रम

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80% से 90% तक अनुदान पर बकरियां देकर पशुपालकों को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर

विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार

बगहा। क्षेत्र के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए पशु शल्य चिकित्सालय परिसर, बगहा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना” के तहत बकरियों का भव्य वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशुपालकों की भागीदारी रही और पूरे आयोजन को पारदर्शिता, अनुशासन एवं उत्साह के माहौल में संपन्न किया गया। योजना के तहत सामान्य वर्ग के लाभुकों को 80 प्रतिशत अनुदान तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभुकों को 90 प्रतिशत तक के भारी अनुदान पर उन्नत नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई गईं। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पशुपालकों को बड़ा सहारा मिला है, जिससे वे कम लागत में बेहतर आय का स्रोत विकसित कर सकेंगे।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि केवल बकरी वितरण तक ही इसे सीमित नहीं रखा गया, बल्कि पशुपालकों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक पद्धति से बकरी पालन करने के लिए विस्तृत प्रशिक्षण भी दिया गया। बेतिया से आए सहायक कुक्कुट पदाधिकारी एवं विशेषज्ञों ने पशुपालकों को बकरी पालन के आर्थिक महत्व, संतुलित आहार, उचित देखभाल, स्वच्छता, प्रजनन प्रबंधन तथा विभिन्न रोगों की पहचान एवं उनके समय पर उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन किया जाए तो यह कम समय में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय साबित हो सकता है। संपूर्ण वितरण प्रक्रिया पशु शल्य चिकित्सक डॉ. संजय कुमार की देखरेख में अत्यंत पारदर्शी एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। उन्होंने प्रत्येक बकरी की बारीकी से स्वास्थ्य जांच करने के बाद ही लाभुकों को सौंपने की अनुमति दी। इसके साथ ही पशुओं की पहचान एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मौके पर ही इयर टैगिंग की व्यवस्था की गई, जिसे बगहा-1 के वैक्सीनर अभय कुमार पाण्डेय एवं चंदन शुक्ल द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विभागीय कर्मियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। मौके पर डाटा एंट्री ऑपरेटर ज्ञान प्रकाश तिवारी, कार्यालय परिचारी गोपीचंद चौरसिया सहित कई अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय पशुपालक एवं ग्रामीणों ने भाग लेकर इस योजना के प्रति अपनी उत्सुकता और विश्वास व्यक्त किया।कुल मिलाकर यह कार्यक्रम न केवल पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित हुआ, बल्कि क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा पशुपालन को एक मजबूत व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं ग्रामीण विकास की आधारशिला साबित होंगी और आने वाले समय में बगहा क्षेत्र पशुपालन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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