Tuesday, June 9, 2026
No menu items!
Google search engine
Home आस पास हवन के समय वार्तालाप पूर्णतः निषेध है -पं०भरत उपाध्याय

हवन के समय वार्तालाप पूर्णतः निषेध है -पं०भरत उपाध्याय

0
2

विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हुए कहा कि -पूजा पाठ में हवन और “पञ्चामृत” का विशेष महत्व है। हमारे हिन्दू धर्म में पौराणिक मान्यताओं तथा आयुर्वेद के अनुसार ‘पञ्चामृत’ को अत्यन्त पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। जैसा कि शब्द से ही विदित है ‘पञ्चामृत’ (पञ्च-अमृत) पाँच शुद्ध प्राकृतिक पदार्थों : १- दूध (गाय का कच्चा दूध), २- दही (गाय के दूध से बना दही), ३- घी (गाय के दूध से बना घी), ४- शहद और ५- मिश्री (या चीनी) का विशिष्ट अनुपात में एक मिश्रण होता है। इसका न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
पञ्चामृत में प्रयुक्त पांच घटकों की अपनी अलग विशेषता, उपयोगिता तथा महत्व है! शास्त्रों में कहा गया है कि हवन के समय वार्तालाप न करें।
स्नान करते समय बोलने वाले के तेज को वरुण हरण कर लेते हैं,हवन करते समय बोलने वाले की श्री को अग्नि देव हरण कर लेते हैं तथा भोजन करते समय बोलने वाले की आयु को यमदेव हरण कर लेते हैं। अतः उक्त तीनों कर्मों में मनुष्य को नहीं बोलना चाहिए।इसी प्रकार भगवान सूर्य देव को जल तांबे का लोटा, उसमें जल, कुमकुम,लालफुल,अक्षत हो!जल के धार बीच नजर सूरज पर होनी चाहिए, वह भी सुबह सात बजे से पूर्व! सूर्य को जल नंगें पांव नहीं देना चाहिए पैर के नीचे लकड़ी या कुश हो। चढ़ा हुआ जल पैर पर नहीं आना चाहिए, वरना धन का नाश होगा। अतः उसे किसी गमले में डालें।
अंतिम सुझाव पूजा पाठ एवं हवन, विधि पूर्वक, विद्वान पंडित से ही करावें जिससे पूजा पूर्ण रूप से फलदाई हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!