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श्रेष्ठ इंसान को! जाने के बाद भी लोग तहेदिल से याद करते हैं-पं०भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने शुभाश्रम सिद्धपीठ के संस्थापक अंतरराष्ट्रीय मानस वक्ता रहे श्रद्धेय द्विजेंद्र मणि त्रिपाठी ऊर्फ चुटकी बाबा जी की षष्टम पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि -वे अक्सर कहा करते थे कि,
स्वभाव में ही किसी व्यक्ति का प्रभाव झलकता है। महान व्यक्तित्व की अपनी एक विशिष्टता होती है। जिस प्रकार कस्तूरी की पहचान उसकी सुगंध से होती है,उसी प्रकार व्यक्तित्व की भी अपनी एक सुगंध होती है, जिसे बताया अथवा दिखाया तो नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है।

व्यक्तित्व की भी अपनी भाषा होती है जो कलम या जिह्वा के प्रयोग के बिना भी लोगों के अंतर्मन को छू जाती है। सिंहासन पर बैठकर व्यक्तित्व महान नहीं बनता अपितु महान व्यक्तित्व एक दिन जन-जन के हृदय सिंहासन पर अवश्य बैठ जाता है। सिंहासन पर बैठना जीवन की उपलब्धि हो अथवा नहीं लेकिन किसी के हृदय में बैठना जीवन की वास्तविक उपलब्धि अवश्य है। राज सिंहासन पर बैठ सको अथवा न बैठ सको लेकिन किसी के हृदय सिंहासन पर बैठ सको तो समझना चाहिए कि आपका जीवन सार्थक हो गया है। अच्छा स्वभाव ही दूसरों के मन पर गहरा प्रभाव भी डाल पाता है।


विख्यात कथावाचक,मानस मर्मज्ञ अखिलेश शाण्डिल्य ने चुटकी बाबा जी को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे हमने बहुत कुछ सीखा है। उनका कहना कि -आप जितना स्वयं को स्वीकारते हो, उतना ही सुंदर और मुक्त जीवन हो जाता है। इंकार से दुःख पैदा होता है और स्वीकार से शांति।नजर से नजरिया का, स्पर्श से नीयत का, भाषा से भाव का,बहस से ज्ञान का और व्यवहार से संस्कार का पता चल जाता है।
अपनी भीगी आंखों से श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए सर्व श्री योगिश मणि, घनश्याम मणि, एडवोकेट प्रेम नारायण मणि त्रिपाठी,अरविन्द मणि,शिवम पाण्डेय ,गुलाब सैनी आदि ने भावपूर्ण नमन किया।

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