विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बेतिया में “सैयां भये कोतवाल, अब डर काहे का” वाली कहावत परिवहन विभाग पर सटीक बैठती है। राज देवड़ी इलाके में प्रतिदिन दर्जनों ओवरलोड ईंट लदे ट्रैक्टर खुलेआम खड़े देखे जा सकते हैं, लेकिन मजाल है कि किसी अधिकारी की नजर इन पर पड़ जाए। शहर की सड़कों पर गिट्टी, बालू और ईंटों से ऊपर तक लदे ये वाहन धड़ल्ले से रफ्तार भर रहे हैं, जिससे मासूम स्कूली बच्चों और आम राहगीरों की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की मौत का इंतजार कर रहा है।
विभागीय भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जवाबदेही तय करने के नाम पर सिर्फ पल्ला झाड़ा जा रहा है।

जब सवाल पूछा जाता है, तो परिवहन विभाग खनन विभाग पर जिम्मेदारी डाल देता है और खनन विभाग वापस गेंद परिवहन विभाग के पाले में डाल देता है। अधिकारियों की इस नूराकुश्ती के बीच अवैध और ओवरलोड गाड़ियों का सिंडिकेट फल-फूल रहा है। सूत्रों की मानें तो यह खेल पूरी तरह ‘मैनेज’ है, जिसमें अधिकारियों को भविष्य के हादसों से कोई सरोकार नहीं है। शायद उनके मन में यह धारणा घर कर चुकी है कि अगर कोई बड़ा हादसा हुआ भी, तो सस्पेंशन और जांच के नाम पर महज खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा। फिलहाल, बेतिया की जनता इन बेलगाम ट्रैक्टरों और लापरवाह सिस्टम के बीच अपनी जान हथेली पर लेकर चलने को मजबूर है।






