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प्राचीन परंपरा जनवासे, शिष्टाचार को पसंद कर रहे हैं लोग -पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने बचपन की यादें जीवंत होते देख कर कहा कि -आज का परिवेश तेजी से बदल रहा है। तकनीक व इंटरनेट मीडिया ने जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। युवा पीढ़ी में दिखावे व प्रति स्पर्धा की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जिससे मानसिक दबाव भी महसूस किया जा रहा है। पारिवारिक संवाद में कमी व व्यक्तिगत संबंधों में दूरी चिंता का विषय है। ऐसे समय में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी संस्कृति और मूल्यों को सहेजना होगा। आज भी प्राचीन परंपरा को कायम रखने के पक्षधर अधिकांश लोग हैं। सिरसिया दीक्षित के रहने वाले पंडित वशिष्ट दीक्षित, प्रधानाचार्य अश्वनी कुमार पांडेय, चंद्रशेखर दिक्षित जैसे श्रेष्ठ विद्वान गण आज के टूटते वैवाहिक संबंधों, परिवार में अशांति की जड़ में संस्कार विहीन वैवाहिक कार्यक्रम को त्रुटि पूर्ण माना है। साथही यह निर्णय लिया गया की शुभ विवाह के अवसर पर बारात दो दिन रहेगी और मरजाद, शिष्टाचार भी होगा। वैवाहिक कार्यक्रम विधि विधान से होगा। इस में कोई भी जल्दबाजी दोनों पक्ष को स्वीकार नहीं होगी। जो लोग कहते हैं कि मेरे पास समय नहीं है, ऐसे लोगों को निमंत्रित ही नहीं किया जाएगा। हालांकि 90% नात रिश्तेदार पूरे समय तक आनंदपूर्वक मांगलिक कार्यक्रम का लुत्फ उठाते हुए इस परंपरा को कायम रखने का संकल्प दोहराया।

आज की भागम भाग की जिंदगी से आजीज, परेशान लोगों को जनवासा के समय अपने वैवाहिक कार्यक्रम की चर्चा करते देखा गया।शिष्टाचार के समय प्रश्न किया गया न्यायशास्त्रे कति पदार्थ सन्ति अर्थात न्याय शास्त्र के अनुसार पदार्थ कितने हैं वर पक्ष से कोई उत्तर दिया ,फिर प्रश्न उत्तर की‌ प्रक्रिया थोड़ी देर चली। यह वाद विवाद गिने चुने लोगों को ही समझ में आया ।कहीं से आवाज आई अब पंडितों का शास्त्रार्थ हो गया ।मनोरंजन करने वालों को बुलाएं ।पहले के बारातों की तरह मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। शास्त्रार्थ के बाद जनवासे में नाच गान की व्यवस्था थी। यह कार्यक्रम मोटे कपड़े का सतरंगी टेंट जिसे चोप बांस की पाइप के सहारे रोका गया था, फिर उसे नीचे जमीन तक रस्सी लगाकर बांस की खूंटी के सहारे रोका गया था। जो हल्की बारिश व हवा के झोंकों को रोक लेता, में हुआ।बीती रात विधि पूर्वक वैवाहिक कार्यक्रम भी संपन्न हुआ।

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