रहुआ टोला, चकदहवा और झंडू टोला में स्वास्थ्य शिविर लगाकर मरीजों की हो रही जांच, दवाओं का वितरण और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव शुरू
नंदलाल पटेल बाल्मीकि पश्चिम चंपारण, बिहार
वाल्मीकिनगर, पश्चिम चंपारण। वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब प्रभावित इलाकों में बीमारी और संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। रहुआ टोला सहित दुर्गम क्षेत्र चकदहवा और झंडू टोला में स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। वहीं, संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर और कीटनाशक का छिड़काव भी शुरू कर दिया गया है। बाढ़ के दौरान लंबे समय तक जलजमाव रहने के कारण गांवों में गंदगी, दूषित पानी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका बनी हुई है। पानी उतरने के बाद विभिन्न प्रकार की मौसमी बीमारियों और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों में पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है। शिविर में मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श देने के साथ जरूरत के अनुसार निशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित बस्तियों में साफ-सफाई और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जलजमाव वाले स्थानों पर संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। ग्रामीणों को भी स्वच्छ पेयजल के उपयोग और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गौरतलब है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर पूर्व मुखिया पति राजलाल महतो ने सरकार और संबंधित विभाग से विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने, आवश्यक दवाओं की व्यवस्था करने तथा संक्रमण की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य अभियान तेज किया गया है। वहीं, पूर्व बीडीसी गुलाब अंसारी ने बताया कि बाढ़ के कारण दुर्गम क्षेत्रों में पहले से ही आवागमन प्रभावित रहा है। ऐसे में ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम की नियमित तैनाती और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने की जरूरत बताई। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब प्रभावित परिवारों के सामने स्वास्थ्य सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद है।






