वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
भाद्रपद मास के त्रयोदसी को भगवान शिव पर जलाभिषेक के लिए कांवरियो का जत्था रविवार को वाल्मीकिनगर स्थित त्रिवेणी के संगम तट से जलभरी के लिए उमड़ पड़ी।जिसमें दूरदराज से सैकड़ों की संख्या में शिव भक्त कांवरिया पहुंचे।मान्यता है कि सनातन धर्म में तेरस का विशेष महत्व है।विशेषकर भगवान भोले शंकर के जलाभिषेक का है।हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।जो पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है।तेरस के दिन शिव लींग पर जल चढ़ाना कभी पुण्य का काम होता है।त्रयोदसी को जलाभिषेक के लिए पूर्वी चंपारण मोतिहारी के घोड़ासहन स्थित चम्पापुर गांव से आए शिव भक्त रामवक्त राम,जय प्रकाश शर्मा,उपेंद्र यादव,राजदेव राय,मिश्री पासवान,मुन्नी देवी,देवपति देवी,सोनी देवी,शारदा देवी उपेंद्र भगत,सिया भगत आदि शिव भक्तों ने बताया कि हम लोग एकादशी मंगलवार को जलबोझी कर संकल्प करते हुए अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करेंगे।

तथा त्रयोदसी गुरुवार को सेमरी स्थित महादेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।साथ ही शिव भक्तों ने बताया कि जलबोझी से पूर्व हम लोग त्रिवेणी संगम तट पर पहुंच कर अपने आप को पूर्ण रूप से शुद्ध कर अपना खाना खुद बना कर खाते हैं।जलबोझी से पूर्व हम पुरुष शिव भक्त अपना मुंडन कराते हैं।उसके बाद सकंल्प करते हुए जल ले कर अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान करते हैं।त्रयोदसी के दिन जलाभिषेक के विभिन्न जगहों से सैकड़ों की संख्या महिला व पुरुष शिव कावरिया जलभरी करने वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं।






