बुके नहीं बुक देकर सम्मान करें -पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


मधुबनी, बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित पीएम श्री राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने पुस्तकालय सभागार में-०१सितम्बर को हिंदी माह का शुभारंभ करते हुए कहा कि -समाज में अतिथियों के स्वागत की परंपरा प्राचीन है। स्वागत के दौरान पुष्प गुच्छ भेंट करना सामान्य चलन है, लेकिन अक्सर यह पुष्प गुच्छ कुछ ही समय बाद अनूप योगी हो जाते हैं ।ऐसे में यदि पुष्प गुच्छ के स्थान पर प्रेरणादायक पुस्तकें भेंट करने की परंपरा विकसित की जाए, तो यह अधिक सार्थक पहल होगी। पुस्तकें व्यक्ति के ज्ञानवर्धन के साथ उसके व्यक्तित्व का भी विकास करती हैं। अतिथि स्वयं पुस्तक पढ़ने के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसी तरह जन्मदिन, विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर महंगे उपहार की जगह प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक पुस्तक भेंट करने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।


पूर्व प्राचार्य ने पुस्तकालय की व्यवस्था से प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सामान्य ज्ञान, इतिहास ,भूगोल, विज्ञान, संविधान, साहित्य और रोजगार परक पुस्तकों के साथ महत्वपूर्ण समाचार पत्र- पत्रिकाएं और अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों की उपलब्धता प्रशंसा की बात है। इस अवसर पर आचार्य नीरज शांडिल्य ने कहा कि ज्ञान हमें दिशा देता है और ठहराव सीखाता है, लेकिन जिज्ञासा हमें आगे चलने की प्रेरणा देती है। ज्ञान उत्तरों की संतुष्टि है, तो जिज्ञासा प्रश्नों की भूख। आज भी हम सभी गुरुजी से ज्ञान प्राप्त करने का प्रवाह सतत बनाए हुए हैं। इस अवसर पर सर्वश्री शंभू दयाल सिंह, हरेंद्र किशोर सिंह, आचार्य नीरज कुमार त्रिपाठी, निसार उल हक अंसारी, राजेश रमण कुमार सिंह, विपिन कुमार तिवारी, सुधीर कुमार चतुर्वेदी, प्रशांत सागर,अख्तर हुसैन,शाकिर अंसारी, अमरेंद्र कुमार, सनी यादव, लाल मोहम्मद जी एवं विपिन कुमार आदि उपस्थित रहे।

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