वाल्मीकिनगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
नेपाल में आई भीषण जल प्रलय का असर देर रात वाल्मीकिनगर की गंडक नदी में भी देखने को मिला। नेपाल की त्रिशूली नदी में अचानक बढ़े जलप्रवाह ने रात करीब एक से दो बजे के बीच गंडक बराज पर दस्तक दी। हालांकि, लंबी दूरी तय करने के कारण पानी का वेग काफी कमजोर हो गया, जिससे वाल्मीकिनगर में फिलहाल बड़ी बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। दिनभर बनी आशंकाओं के बीच यह प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए राहत की खबर रही।
गंडक में बहकर आया तबाही का मलबा
नेपाल की ओर से गंडक नदी में इंसानी शव, मवेशियों के शव, गाय-भैंस समेत अन्य जानवरों के अवशेष बहते दिखाई दिए। इसके अलावा गैस सिलेंडर, वाहनों के पहिए और घरों में इस्तेमाल होने वाला विभिन्न सामान भी नदी की तेज धारा के साथ वाल्मीकिनगर की ओर आता नजर आया। रात के अंधेरे में नदी के बीच से इस तरह तबाही का मलबा बहकर आने का दृश्य बेहद चिंताजनक रहा।

नेपाल में आई बाढ़ से त्रिशूली नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जन-धन के नुकसान की सूचनाएं सामने आई हैं। नदी में शव मिलने की खबरों के बीच गंडक में भी आपदा का मलबा पहुंचना इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता को दर्शाता है।
करीब डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंचा जलप्रवाह
संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन, पुलिस और गंडक जल संसाधन विभाग की टीमें पूरी रात अलर्ट रहीं। गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोलकर जलप्रवाह को नियंत्रित करने के साथ नियंत्रण कक्ष से लगातार जलस्तर की निगरानी की गई।

गंडक बराज नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार नदी का जलप्रवाह करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार आशंका के अनुरूप स्थिति भयावह नहीं हुई और देर रात के बाद पानी का प्रवाह कमजोर पड़ने लगा। फिलहाल जलस्तर में कमी की सूचना है और वाल्मीकिनगर में बड़ी बाढ़ का तत्काल खतरा टलता नजर आ रहा है। हालांकि, नेपाल से बहकर आए शवों, मवेशियों और अन्य मलबे ने एक गंभीर चेतावनी जरूर दी है कि पहाड़ों में आई प्राकृतिक आपदा का असर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंच सकता है। ऐसे में गंडक नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।






