प्रशासन द्वारा बुलडोजर और भारी बल के साथ कार्रवाई, जिससे सैकड़ो परिवार के सामने आशियाना उजड़ने का मंडराया संकट
वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट
पर्यटन नगरी वाल्मीकि नगर पंचायत में गंडक विभाग की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए जारी नोटिस के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों से बसे परिवारों को महज तीन दिनों का समय देकर घर खाली करने का निर्देश दिया गया है। लोगों का कहना है कि आगामी 27 अगस्त को प्रशासन द्वारा बुलडोजर और भारी बल के साथ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने आशियाना उजड़ने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां रहने वाले कई परिवार तीन से चार पीढ़ियों से रह रहे हैं। करीब 50 से 60 वर्षों से बसे इन परिवारों का कहना है कि वे किसी दूसरे स्थान के भूमिधर नहीं हैं और वर्तमान घर ही उनका एकमात्र आशियाना है। ऐसे में बिना वैकल्पिक जमीन और पुनर्वास की व्यवस्था के मकान तोड़े जाने से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हो जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे विकास या कानून के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विस्थापन से पहले पुनर्वास की ठोस व्यवस्था जरूरी है। लोगों की प्रमुख मांग है कि प्रभावित भूमिहीन परिवारों को पहले वैकल्पिक आवासीय जमीन उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पक्का मकान बनाने के लिए नियमानुसार मुआवजा या पुनर्वास राशि सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने कहा कि “पहले बसाने की लिखित गारंटी, उसके बाद ही विस्थापन” की नीति अपनाई जानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और गंडक विभाग से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है।






