शीरे से बने इथेनॉल से शुगर मिल को हो रही है अतिरिक्त आमदनी -पं०भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने प्रबुद्ध जन के साथ एक वैचारिक गोष्ठी में कहा कि- लोगों में भ्रम हो गया है कि, गन्ने से इथेनॉल बन रहा है, इसलिए चीनी महंगी हो रही है। यह बिल्कुल बकवास है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि चीनी कैसे बनती है और एथेनॉल कैसे बनता है पहले इसकी जानकारी प्राप्त करें! आज इथेनॉल नहीं बिक रहा होता तो चीनी और महंगी मिलती। वास्तव में गन्ने से मुख्य रूप से चीनी बनाई जाती है ।चीनी बनाने के बाद गन्ने का खोई निकलता है, यह बॉयलर में जलाने के काम आता है ,इसके अलावा इससे पेपर और पार्टिकल बोर्ड बनाया जाता है। लगभग 10 किलोग्राम गन्ने से एक किलोग्राम चीनी बनती है, बाकी सब खोई, शीरा और मैल बन जाता है। मैल से जैविक खाद बनाई जाती है। शीरे से जो एथेनॉल बनता है उससे पहले केवल शराब और स्प्रीट बनती थी ।

शराब और स्प्रीट की खपत बहुत कम है, इसलिए पहले बड़े-बड़े गड्ढे में शीरे को डाल दिया जाता था। या फिर नालों में बहा दिया जाता था ।जब से एथेनॉल को पेट्रोल में मिक्स किया जाने लगा है तब से शीरे को फेंकना बंद हो गया है और इससे शुगर मिल को अतिरिक्त आमदनी हो रही है। अतः यह कहना कि एथेनॉल बनाने के कारण चीनी कम बन रही है और इस कारण चीनी महंगी हो रही है गलत बात है। चीनी महंगी होने के अन्य कारण हो सकते हैं ,कम उत्पादन और ईंधन की महंगाई !साथ ही सरकार का सही प्रतिनिधित्व का ना होना। अगर वास्तव में एथेनॉल बनाना बंद हो जाए तो चीनी ₹100 प्रति किलोग्राम के आसपास मिलेगी!
गोष्ठी में प्रमुख रूप से पूर्व प्राचार्य राणा प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य जगदीश नारायण सिंह, दिनेश कुमार गुप्ता, सुनील कुमार सिंह, आकाश मिश्रा सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

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